Thursday, 26 May, 2022
होमदेशफेसबुक को डर है कि बजरंग दल पर प्रतिबंध से स्टाफ की सुरक्षा, और व्यावसायिक संभावनाओं को हो सकता है ख़तरा- WSJ रिपोर्ट

फेसबुक को डर है कि बजरंग दल पर प्रतिबंध से स्टाफ की सुरक्षा, और व्यावसायिक संभावनाओं को हो सकता है ख़तरा- WSJ रिपोर्ट

WSJ रिपोर्ट के मुताबिक़, फेसबुक सेफ्टी टीम इस साल इस निष्कर्ष पर पहुंची, कि बजरंग दल ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का समर्थन किया, और उसे संभावित रूप से ‘ख़तरनाक संस्था’ ठहराया जा सकता है.

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नई दिल्ली: एक आंतरिक आंकलन में, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का समर्थन करने के लिए, ‘ख़तरनाक’ हिंदूवादी राष्ट्रवादी ग्रुप, बजरंग दल पर पाबंदी लगाने की मांग के बावजूद, फेसबुक ने वित्तीय और सुरक्षा चिंताओं के चलते, ये कार्रवाई नहीं की है- ये ख़ुलासा वॉल स्ट्रीट जर्नल (डब्लूएसजे) की एक रिपोर्ट में किया गया है.

रविवार को छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, टेक दिग्गज को अंदेशा है कि बजरंग दल के खिलाफ कार्रवाई से, ‘भारत के सत्तारूढ़ हिंदू राष्ट्रवादी राजनीतिज्ञों के क्रोधित होने का ख़तरा है’ और देश में उसके व्यवसायिक हितों को भी नुक़सान पहुंच सकता है. ग्रुप पर पाबंदी लगाने से, भारत में फेसबुक स्टाफ और उसकी सुविधाओं पर, ‘फिज़िकल हमले’ भी हो सकते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया कि 2020 के शुरू में, कंपनी की सुरक्षा टीम इस नतीजे पर पहुंची, कि बजरंग दल ने ‘पूरे भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का समर्थन किया, और उसे संभावित रूप से ‘ख़तरनाक संस्था’ ठहराया जा सकता है, जिसे इस प्लेटफॉर्म से बैन कर दिया जाना चाहिए.

लेकिन, फेसबुक ‘ग्रुप को हटाने में ठिठक गई’, जब उसकी सुरक्षा टीम ने चेतावनी दी, कि बजरंग दल के खिलाफ कार्रवाई करने से, ‘कंपनी की व्यवसायिक संभावनाओं, और भारत में उसके स्टाफ, दोनों को ख़तरा पैदा हो सकता है’.

डब्लूएसजे रिपोर्ट में कहा गया कि ये मामला, ‘परस्पर विरोधी चिंताओं’ को दिखाता है, जिनसे हेट स्पीच के मामले में, ख़ासकर भारत में, फेसबुक को निपटना पड़ता है.

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कंपनी के भारत में बहुत बड़े हित हैं- इसका सबसे बड़ा यूज़र आधार- जिनमें ज़मीनी स्तर पर नई दिल्ली, मुम्बई, और अन्य शहरों में इसके पांच ऑफिस, और अन्य के अलावा रिलायंस जियो में, 5.7 बिलियन डॉलर के निवेश शामिल हैं. इस बीच, कंपनी की एक ‘ऐसी सरकार से बातचीत रहती है, जिसके राजनेताओं के हिंदू राष्ट्रवादी समूहों से रिश्ते हैं’.

रिपोर्ट में फेसबुक प्रवक्ता एंडी स्टोन का ये कहते हुए हवाला दिया गया है: ‘राजनीतिक स्थिति और पार्टी संबद्धता का ख़याल किए बिना, हम दुनिया भर में, ख़तरनाक व्यक्ति व संस्थाओं के प्रति, अपनी नीति को लागू करते हैं’. स्टोन ने आगे कहा, कि किन इकाइयों पर प्रतिबंध लगाया जाए, ये तय करने की प्रक्रिया ‘सावधान, कठोर और बहु-विषयक’ होनी चाहिए.

एक बजरंग दल प्रवक्ता ने डब्लूएसजे से कहा, कि उसके सदस्य ग़ैर-क़ानूनी हरकतों में हिस्सा नहीं लेते, और उनका ‘दूसरे धार्मिक समूहों से कोई टकराव नहीं है’.


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फेसबुक पर बजरंग दल से जुड़ी सामग्री

डब्लूएसजे की रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक पर एक विडियो में, जिसे तक़रीबन 250,000 बार देखा गया, बजरंग दल ‘नई दिल्ली के बाहर’ एक पेंटेकोस्टल चर्च पर जून से ‘चढ़ाई’ का ज़िम्मा ले रहा था, ये आरोप लगाते हुए, कि वो एक हिंदू मंदिर के ऊपर बना था.

रिपोर्ट में कहा गया ‘इस चढ़ाई में दर्जनों धार्मिक उग्रवादी शामिल थे, और उन्होंने ‘विरोध में वहां एक हिंदू मूर्ति स्थापित कर दी’.

उस वीडियो को जीत वशिष्ठ द्वारा पोस्ट किया गया था, जिसे 21 वर्ष की उम्र का, और बजरंग दल का एक ज़िला अध्यक्ष बताया गया था. विडियो में वशिष्ठ को ये कहते दिखाया गया था, ‘मैं और दूसरे हिंदू भाई यहां आए, और ज़बर्दस्ती मंदिर को फिर से स्थापित कर दिया’. लेकिन वशिष्ठ ने किसी भी चर्च पदाधिकारी पर, हमला करने की बात से इनकार किया.

रिपोर्ट में कहा गया कि जब डब्लूएसजे ने, कंपनी से वीडियो को हटाने के लिए कहा, तो फेसबुक ने उसे हटा दिया.

डब्लूएसजे की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए), बजरंग दल को एक ‘उग्रवादी धार्मिक संगठन’ मानती है. इस समूह को समर्पित फेसबुक समुदाय, ‘हिंदूवाद के खिलाफ कथित अपराधों के लिए, लोगों को पीटे जाने या मारे जाने की तस्वीरों पर जश्न मनाते हैं’.

फेसबुक स्वामित्व वाला विश्लेषिकी उपकरण क्राउडटैंगल दिखाता है, कि बजरंग दल को समर्पित ‘कुछ मुठ्ठी भर समूहों और पन्नों की ओर से’ 2020 में 55 लाख से अधिक इंटरेक्शंस देखे गए.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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