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Sunday, 12 April, 2026
होमदेशआबकारी नीति : मामले से न्यायाधीश को अलग करने का अनुरोध करने वाली केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई कल

आबकारी नीति : मामले से न्यायाधीश को अलग करने का अनुरोध करने वाली केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई कल

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नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय सोमवार को आबकारी नीति मामले में आरोप मुक्त किए गए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य लोगों की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें अनुरोध किया गया है कि अधीनस्थ अदालत के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को अलग किया जाए।

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अपनी याचिका पर दलील देंगे, जिसकी सुनवाई दोपहर ढाई बजे न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष होगी।

न्यायाधीश ने छह अप्रैल को खुद को मामले से अलग करने के आप प्रमुख के आवेदन को रिकॉर्ड में लिया था और इसे 13 अप्रैल की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।

केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा को मामले से अलग करने का अनुरोध करते हुए दावा किया है कि इस बात की गंभीर, वास्तविक और उचित आशंका है कि उनके समक्ष मामले की सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ नहीं होगी।

केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक समेत अन्य आप नेताओं ने भी न्यायाधीश को मामले से अलग करने के लिए आवेदन दायर किए हैं। विजय नायर और अरुण रामचंद्र पिल्लई सहित अन्य प्रतिवादियों ने भी इसी तरह के आवेदन दायर किए हैं।

अधीनस्थ अदालत ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य को बरी कर दिया और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को फटकार लगाते हुए कहा कि उसका मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से विफल रहा और पूरी तरह से निराधार साबित हुआ।

न्यायमूर्ति शर्मा ने नौ मार्च को सीबीआई की उस याचिका पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने आरोपियों को आरोप मुक्त किए जाने के खिलाफ अपील की थी।

उन्होंने कहा कि आरोप तय करने के चरण में अधीनस्थ अदालत की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण प्रतीत होते हैं और उन पर विचार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने शराब नीति मामले में सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू किये जाने की अधीनस्थ अदालत की सिफारिश पर भी रोक लगा दी।

दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई को न्यायमूर्ति शर्मा से किसी अन्य न्यायाधीश को स्थानांतरित किये जाने से जुड़े केजरीवाल के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और कहा कि इस मामले से अलग होने का निर्णय संबंधित न्यायाधीश को लेना है।

न्यायमूर्ति शर्मा को इस मामले से अलग करने की अर्जी को खारिज करने का अनुरोध करते हुए सीबीआई ने अपने जवाब में कहा है कि केजरीवाल और अन्य लोग न्यायमूर्ति शर्मा को केवल इसलिए मामले से अलग करने का अनुरोध नहीं कर सकते कि उन्होंने अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (आरएसएस से संबद्ध वकीलों का एक संघ) द्वारा आयोजित एक ‘कानून से जुड़े सेमिनार’ में भाग लिया था, क्योंकि इससे किसी भी प्रकार का वैचारिक जुड़ाव नहीं दिखता है।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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