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Wednesday, 25 March, 2026
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भारत में जासूसी के बदलते तरीके, अब स्मार्टफोन और सोशल मीडिया बने नया जरिया

भारतीय नौसेना के एक इंजीनियर से लेकर मुरादाबाद के एक डेंटल छात्र तक, जासूसी के मामले अब स्मार्टफोन स्क्रीन और सोशल मीडिया वेबसाइटों की ओर रुख कर रहे हैं.

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नई दिल्ली: राजस्थान इंटेलिजेंस और एयर फ़ोर्स इंटेलिजेंस ने हाल ही में असम के चाबुआ एयर फ़ोर्स बेस पर तैनात एक सिविलियन कर्मचारी की गिरफ़्तारी के साथ एक देशव्यापी जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. आरोपी, 36 वर्षीय सुमित कुमार, पर आरोप है कि वह पैसे के बदले पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को लड़ाकू विमानों और मिसाइल प्रणालियों की जगहों सहित संवेदनशील सैन्य डेटा लीक कर रहा था.

सुमित का मामला अपनी तरह का अकेला मामला नहीं है. चाहे वह जल्दी पैसा कमाने का लालच हो, या ‘हनी ट्रैप’ का सोची-समझी चाल वाला प्रलोभन, या फिर किसी यूनिवर्सिटी छात्र का धीरे-धीरे कट्टरपंथी बनना—भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक घरेलू और बढ़ता हुआ चुनौती का सामना कर रहा है. जासूसी अब सिर्फ़ एजेंटों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब यह स्मार्टफ़ोन और सोशल मीडिया तक पहुंच गई है. एक अकेला इंस्टाग्राम डीएम या डिस्कॉर्ड पर की गई कोई एन्क्रिप्टेड चैट किसी भी नागरिक को देश का दुश्मन बना सकती है.

उत्तर प्रदेश, राजस्थान और असम में हाल ही में हुई गिरफ़्तारियों की झड़ी—पिछले दो महीनों में 19 गिरफ़्तारियां—ने यह खुलासा किया है कि विदेश में बैठे आका किस तरह जानकारी इकट्ठा करते हैं. मंगलवार को, गाज़ियाबाद पुलिस ने एक चल रहे जासूसी मामले की जाँच के सिलसिले में 20 वर्षीय समीर उर्फ़ ‘शूटर’, 22 वर्षीय समीर और 18 वर्षीय शिवराज को गिरफ़्तार किया.

इन ऑपरेशनों के तहत गिरफ़्तार लोगों पर सख़्त ‘सरकारी गोपनीयता अधिनियम’ के तहत मुक़दमा चलाया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों ने पाया है कि डेटा भेजने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक—चाहे वह वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) हों या सौर-ऊर्जा से चलने वाले अकेले क्लोज़्ड-सर्किट टीवी (CCTV)—काफ़ी उन्नत हो गई है, लेकिन इसमें शामिल मानवीय पहलू आज भी पुरानी कमज़ोरियों पर ही आधारित है: पैसा, हनी-ट्रैपिंग और वैचारिक कट्टरता.

जैसे-जैसे राज्यों की पुलिस फ़ोर्स की विशेष आतंकवाद-रोधी इकाइयां इन जासूसी मॉड्यूल्स की कई परतों पर अपनी कार्रवाई तेज़ कर रही हैं, ‘दिप्रिंट’ मार्च 2026 के उन प्रमुख जासूसी मामलों पर बारीकी से नज़र डाल रहा है, जिनमें हुई गिरफ़्तारियों ने सीमा-पार फैले जासूसी नेटवर्कों की गहराई को उजागर किया है.

एयर फ़ोर्स का कर्मचारी गिरफ़्तार

चाबुआ एयर फ़ोर्स बेस के आरोपी सुमित को भारतीय वायु सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजते हुए पकड़ा गया. एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (इंटेलिजेंस) प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि यह पूरा मामला जनवरी 2026 में जैसलमेर के रहने वाले झबराराम की गिरफ़्तारी के साथ सामने आया.

उससे पूछताछ और उसके बाद हुई जांच के दौरान एक और संदिग्ध—सुमित कुमार—का नाम सामने आया; पता चला कि वह पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसियों के लगातार संपर्क में था. पुलिस ने बताया कि जांच में पता चला कि आरोपी सुमित कुमार, जो उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का रहने वाला है, फ़िलहाल असम के डिब्रूगढ़ में चाबुआ एयर फ़ोर्स स्टेशन पर MTS (मल्टी-टास्किंग स्टाफ़) के तौर पर काम कर रहा था.

पुलिस ने कहा, “अपनी सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए, वह एयर फ़ोर्स स्टेशन से जुड़ी गोपनीय जानकारी इकट्ठा करता था और उसे सोशल मीडिया के ज़रिए पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजता था.”

विभिन्न इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा की गई संयुक्त पूछताछ के दौरान, “यह पता चला कि आरोपी 2023 से ही एक पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी के संपर्क में था और पैसों के बदले संवेदनशील जानकारी साझा कर रहा था,” पुलिस ने बताया.

पूछताछ में आगे यह भी पता चला कि आरोपी ने न केवल चाबुआ एयर फ़ोर्स स्टेशन से जुड़ी, बल्कि बीकानेर ज़िले के नाल एयर फ़ोर्स स्टेशन सहित अन्य सैन्य ठिकानों से जुड़ी भी अहम जानकारी साझा की थी. इस जानकारी में लड़ाकू विमानों और मिसाइल प्रणालियों के स्थान के साथ-साथ अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़ा गोपनीय डेटा भी शामिल था.

तकनीकी रूप से दक्ष लेकिन गरीब युवाओं की भर्ती

14 मार्च से, गाज़ियाबाद पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि लोगों का एक समूह CCTV कैमरे लगा रहा है. जब पुलिस ने मामले की जांच की, तो पता चला कि इस समूह का नेतृत्व दो-तीन हैंडलर्स—नौशाद अली और सुहैल मलिक—कर रहे थे, और यह गिरोह इंस्टाग्राम के ज़रिए “तकनीकी रूप से दक्ष” लेकिन गरीब युवाओं को निशाना बनाता था, जिनमें ज़्यादातर मोबाइल मैकेनिक और CCTV ऑपरेटर शामिल थे.

भर्ती किए गए ये लोग GPS-टैग वाले कैमरा ऐप्स का इस्तेमाल करके रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा ठिकानों की फ़ोटो और वीडियो बनाते थे. जांच में यह भी पता चला कि इस समूह ने दिल्ली कैंट और सोनीपत स्टेशन पर सौर ऊर्जा से चलने वाले CCTV कैमरे लगाए थे, ताकि विदेशी नंबरों पर रियल-टाइम फ़ीड भेजी जा सके. SIT ने 18 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया, जिनमें छह नाबालिग और कुछ महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्हें शक से बचने के लिए इस काम पर लगाया गया था. हालांकि और भी गिरफ्तारियां हो रही हैं, गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि उसने दो साल पुराने जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है.

मुरादाबाद से ब्रेनवॉश

16 मार्च को, उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने मुरादाबाद से 19 साल के डेंटिस्ट्री के दूसरे साल के छात्र हारिस अली को गिरफ्तार किया. पुलिस का आरोप है कि अली इस्लामिक स्टेट (ISIS) के लिए एक हाई-टेक ऑनलाइन सेल चला रहा था, और प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए VPN और सेशन और डिस्कोर्ड जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा था.

भर्ती के अलावा, हारिस ने मारे गए आतंकवादियों का महिमामंडन करने और राज्य के खिलाफ आत्मघाती हमलों के लिए उकसाने के मकसद से ‘अल-इत्तिहाद मीडिया फाउंडेशन’ भी बनाया था. पुलिस ने बताया कि उसका नेटवर्क भारत और पाकिस्तान में मौजूद हैंडलर्स तक फैला हुआ था, जिसका मकसद लोकतांत्रिक व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए ‘मुजाहिदों (लड़ाकों)’ का ब्रेनवॉश करना था. सहारनपुर के रहने वाले अली को UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया है.

आगरा से हनी ट्रैपिंग का एक क्लासिक मामला

10 मार्च को, उत्तर प्रदेश ATS ने आगरा के चितपुर गांव से 24 साल के आदर्श कुमार, उर्फ लकी को गिरफ्तार किया. आदर्श भारतीय नौसेना में ‘लीडिंग मैकेनिक’ के पद पर तैनात था—यह पद सेना के ‘लांस नायक’ के बराबर होता है—और उसकी पोस्टिंग दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में थी. पुलिस के मुताबिक, आदर्श कथित तौर पर एक क्लासिक ‘हनी ट्रैप’ का शिकार हो गया था; यह तब हुआ जब उसने इंस्टाग्राम पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ‘इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस’ (ISI) से जुड़े एक प्रोफाइल से संपर्क साधा.

जांच में पता चला कि आदर्श ने न सिर्फ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण युद्धपोतों की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए थे, बल्कि इसमें पैसों का लेन-देन भी शामिल था. एक फौजी से जासूसी के मामले में आरोपी बनने का यह सफर इंस्टाग्राम पर एक साधारण से ‘डीएम’ से शुरू हुआ और आखिरकार गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत में खत्म हुआ.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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