नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने गुरुवार को दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भारत में मुस्लिम पार्टियों का उभरना एक अच्छा रुझान नहीं है.
पूर्व राजनयिक अंसारी ने कहा, “क्योंकि लोकतंत्र में काम स्किन के रंग के आधार पर नहीं होता. लोकतंत्र इस सिद्धांत पर चलता है कि सभी बराबर हैं”
उन्होंने “भाईचारे” को संविधान का एक अहम सिद्धांत बताया.
अंसारी ने आगे कहा, “लेकिन फिर भी, एक नागरिक के तौर पर आप इसे रोक नहीं सकते. जैसे सिखों की पार्टी हो सकती है. ईसाइयों की पार्टी हो सकती है. हिंदुओं की पार्टी हो सकती है. बौद्धों की पार्टी हो सकती है. मुसलमानों की भी पार्टी हो सकती है. यह उनके हित में है या नहीं और यह देश के बड़े हित में है या नहीं, यह देखा जाना बाकी है.”
अंसारी अपनी नई किताब Arguably Contentious: Thoughts on a Divided World पर बात कर रहे थे.
हालांकि, उन्होंने कांग्रेस पर मुस्लिम नेतृत्व को नज़रअंदाज़ करने के आरोप पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन अंसारी ने साफ किया, “मुद्दा यह है कि मुस्लिम हो या गैर-मुस्लिम, हर कोई नागरिक है और अगर वह नागरिक है, तो उसे राजनीतिक प्रक्रिया में, चुनावों सहित, बराबर हिस्सा लेने का पूरा अधिकार है. अगर ऐसा नहीं हो रहा है, तो साफ है कि कहीं कमी है और वह कमी लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है.”
उन्होंने कहा कि हाल के समय में बराबर भागीदारी नहीं हो रही है और इसका कारण “राजनीतिक खिलाड़ियों का फैसला” है. उन्होंने यह भी माना कि पार्टियां मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं दे रही हैं.
भू-राजनीति पर बात करते हुए अंसारी ने कहा कि दुनिया मुश्किल और जटिल है और “हालात को देखते हुए देश अपनी तरफ से सबसे अच्छा करने की कोशिश कर रहा है.”
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से भारत के रिश्तों पर बोलते हुए उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “वे संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति हैं, इसलिए वैश्विक राजनीति में एक अहम खिलाड़ी हैं. उनकी अपनी आदतें और तौर-तरीके हैं. हमें उनके साथ रहकर ही काम करना होगा.”
‘विपक्ष को टिप्पणी करने का हक’
अंसारी ने इस हफ्ते संसद में हुए हंगामे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. इस हंगामे में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे की अपनी अप्रकाशित किताब में चीन की आक्रामकता पर किए गए कथित खुलासों पर बोलने की अनुमति नहीं दी गई.
इसके बाद आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया और लोकसभा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बिना ही पारित कर दिया.
हालांकि, अंसारी ने कहा कि पहले संसद साल में 100 दिन बैठती थी, जबकि अब यह संख्या लगभग 50 या 60 रह गई है.
उन्होंने कहा, “दूसरे शब्दों में, सांसदों द्वारा संसद को दिया जाने वाला समय लगभग आधा हो गया है. अब इसमें से कितना समय उपयोगी है और कितना बेकार, यह अलग बात है. मैं रोज़मर्रा की सभी घटनाओं पर टिप्पणी नहीं करूंगा.”
उन्होंने यह भी कहा कि “जब तक बाधाएं और स्थगन एक तय सीमा के भीतर हैं”, तब तक वे कुछ हद तक संसद के कामकाज का हिस्सा हैं.
किसी खास मामले पर टिप्पणी किए बिना अंसारी ने कहा, “सरकार, ज़ाहिर है, उस समय की सरकार होती है. लोकतांत्रिक समाज में विपक्ष की अपनी इच्छा होती है, इसलिए वे आज की घटनाओं पर टिप्पणी करने के लिए स्वतंत्र हैं और उन्हें यह अधिकार होना भी चाहिए.”
और अगर विपक्ष को मुद्दों पर टिप्पणी करने की अनुमति नहीं दी जाती, तो अंसारी ने कहा, “यह लोकतंत्र की परंपरा का हिस्सा नहीं है.”
‘पूरी तरह से नाइंसाफी’
फिलिस्तीन पर अंसारी ने कहा कि “फिलिस्तीनियों के साथ उनकी ही ज़मीन पर जो किया गया है, वह पूरी तरह से नाइंसाफी है” और यह कि “इज़राइल ही आक्रामक है, इस पर दो राय नहीं हो सकती.”
उन्होंने कहा कि इसका समाधान यही है कि फिलिस्तीनियों को वह मिले जो उनका हक है, “यह किसी इनाम की तरह नहीं, बल्कि उनके अधिकार के रूप में मिलना चाहिए. जैसे दुनिया में कहीं भी किसी और का अधिकार होता है, वैसे ही उनका भी अधिकार है. उन्हें अपने अधिकार मिलने चाहिए.”
अंसारी के मुताबिक, संसदीय लोकतंत्र एक “हॉकी का खेल” है.
उन्होंने समझाया, “दोनों टीमें खेलती हैं. अब अगर एक टीम खेल ही नहीं रही है, या एक टीम कमज़ोर तरीके से खेल रही है—जानबूझकर या अनजाने में, यह मैं नहीं जानता, तो साफ है कि खेल ठीक से नहीं खेला जा रहा.”
राज्यसभा के सभापति रहते हुए भी अंसारी अक्सर कहते थे कि वह खुद को हॉकी मैच का रेफरी मानते हैं.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “मेरे पास एक सीटी है. मैं खेल को बहुत ध्यान से देखता हूं, क्योंकि मैं उसके क़रीब होता हूं, लेकिन अगर खिलाड़ी नियमों के मुताबिक खेलते हैं, तो मुझे सीटी बजाने की ज़रूरत नहीं पड़ती. अगर वे ऐसा नहीं करते, तो मैं सीटी बजाता हूं, चाहे कोई भी पक्ष कुछ भी करे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
