गोपेश्वर, 14 जनवरी (भाषा) उत्तराखंड के चमोली जिले में नंदा देवी वन्यजीव वन प्रभाग के जंगलों में पिछले पांच दिनों से धधक रही आग को बुझाने के प्रयासों के तहत बुधवार को हेलीकॉप्टर से क्षेत्र का जायजा लिया गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
हालांकि, वनाग्नि नियंत्रण की जिम्मेदारी संभाल रहे बदरीनाथ वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी सर्वेश दुबे ने स्पष्ट किया कि गोविंदघाट वन रेंज की पुष्पावती घाटी में पुलना और भ्यूंडार क्षेत्र के जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए हेलीकॉप्टर से पानी की बौछारें करने का विकल्प नहीं अपनाया जाएगा।
दुबे ने कहा, ‘‘हेलीकॉप्टर से क्षेत्र जायजा लिया गया, लेकिन उससे पानी की बौछारें करना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि पानी भरने के लिए उसे टिहरी झील जाना पड़ेगा और वह एक घंटे में केवल 1,200 लीटर पानी ही गिरा पाएगा।’’
उन्होंने बताया कि वन प्रभाग के अधिकारी और कर्मचारियों की टीम वनाग्नि स्थल पर पहुंच चुकी हैं और उनकी मदद से आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। आग पर पूरी तरह काबू पाने में कम से कम दो दिन लग सकते हैं।
दुबे ने कहा कि वनाग्नि प्रभावित क्षेत्र अत्यधिक चट्टानी और दुर्गम होने के कारण आग पर नियंत्रण पाने में कठिनाई आ रही है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आग का दायरा फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान से बाहर है। वनाग्नि प्रभावित क्षेत्र के दोनों ओर क्रमशः लक्ष्मण गंगा और पुष्पावती नदियां बहती हैं और ये नदियां प्राकृतिक रूप से आग को फैलने से रोकने का काम कर रही हैं। इससे फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब तक आग के फैलने की आशंका कम नहीं है।
उन्होंने बताया कि वनाग्नि स्थल से फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान की हवाई दूरी लगभग सात किलोमीटर और जमीनी दूरी करीब 22 से 25 किलोमीटर है तथा पार्क क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है।
यह वनाग्नि नौ जनवरी से सक्रिय है और तभी से वन विभाग, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
भाषा सं दीप्ति खारी
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