कोलकाता, आठ जनवरी (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) क्षेत्रों से जुड़े करोड़ों रुपये के तस्करी गिरोह की जांच करते हुए बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल स्थित गैर-सूचीबद्ध औद्योगिक समूह, शाकंभरी ग्रुप को अवैध रूप से खनन किए गए कोयले के प्रमुख अंतिम उपयोगकर्ता के रूप में चिह्नित किया।
पश्चिम बंगाल और दिल्ली में तलाशी के बाद एक आधिकारिक बयान में, ईडी ने कहा कि ईसीएल पट्टे वाले क्षेत्रों से अवैध रूप से निकाले गए कोयले का एक “बड़ा हिस्सा” शाकंभरी समूह द्वारा संचालित विनिर्माण इकाइयों को बेचा गया था।
एजेंसी ने बताया कि चोरी किए गए कोयले की आपूर्ति बांकुरा, पुरुलिया और बर्धमान जैसे जिलों में स्थित कारखानों को की गई थी।
यह जांच सीबीआई द्वारा 2020 में कोयला तस्करी के कथित सरगना अनूप माजी और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी से संबंधित है।
ईडी के अनुसार, जांच में धनशोधन की एक बहुस्तरीय व्यवस्था का खुलासा हुआ है जिसमें हवाला संचालकों का कथित तौर पर अपराध की आय को स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
एजेंसी ने कहा कि ऐसे ही एक संचालक पर इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (आई-पैक) को “दसियों करोड़ रुपये” के लेनदेन में सुविधा प्रदान करने का संदेह है।
ईडी ने बताया कि बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल में छह और दिल्ली में चार स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें अवैध कोयला व्यापार से प्राप्त आय के उत्पादन, परिवहन और धनशोधन से जुड़े परिसरों को लक्षित किया गया।
दीपक कुमार अग्रवाल शाकंभरी समूह के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं। यह समूह पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े एकीकृत इस्पात निर्माताओं में से एक है।
यह समूह कई स्पंज आयरन, इस्पात और बिजली इकाइयों का संचालन करता है और ‘थर्मोकॉन’ तथा ‘एलिगेंट’ जैसे ब्रांड नाम के तहत उत्पादों का विपणन करता है।
शाकंभरी समूह की कोई भी कंपनी किसी भी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं है।
भाषा प्रशांत वैभव
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