नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) आयकर विभाग ने चालू वित्त वर्ष में संपूर्ण जांच के लिए आयकर रिटर्न चुनने के दिशानिर्देश जारी किए हैं। विभाग ने कहा कि ऐसी जांच उन मामलों में लागू होगी, जहां कर चोरी के बारे सूचना किसी अन्य प्राधिकरण से मिली है।
इन दिशानिर्देशों के तहत कुछ मामलों में प्रधान आयुक्त/ प्रधान निदेशक/ आयुक्त/ निदेशक की प्रशासनिक मंजूरी पाने की एक अतिरिक्त शर्त जोड़ी गई है। मंजूरी मिलने के बाद ही संपूर्ण जांच के लिए ऐसे मामलों का चयन किया जा सकेगा।
उदाहरण के लिए सर्वेक्षण, तलाशी और जब्ती से संबंधित मामले और ऐसे मामले, जहां धर्मार्थ ट्रस्टों ने वैध अनुमोदन के बिना छूट का दावा किया है, वहां जांच नोटिस देने से पहले मंजूरी लेनी होगी।
संपूर्ण जांच के तहत कर अधिकारी करदाता द्वारा किए गए विभिन्न दावों, कटौतियों आदि की पुष्टि करने के लिए आयकर रिटर्न की विस्तृत जांच करते हैं।
नांगिया एंडरसन एलएलपी के भागीदार संदीप झुनझुनवाला ने कहा कि कर चोरी से संबंधित ऐसे मामले, जहां प्रवर्तन एजेंसियों से जानकारी उपलब्ध है, उन्हें भी आयकर प्रावधानों के तहत अनिवार्य संपूर्ण जांच के दायरे में लाया गया है।
उन्होंने कहा कि इन दिशानिर्देशों से मुकदमेबाजी में कमी होगी और अधिक महत्वपूर्ण मामलों पर पूरा ध्यान देने में मदद मिलेगी। उन्होंने इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया।
भाषा पाण्डेय अजय
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