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Wednesday, 25 February, 2026
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निजी कंपनी को नोएडा, ग्रेटर नोएडा में बिजली वितरण लाइसेंस देने के कदम का विरोध करेंगे: एआईपीईएफ

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नयी दिल्ली, 11 जनवरी (भाषा) बिजली क्षेत्र में काम कर रहे इंजीनियरों के महासंघ (एआईपीईएफ) ने बुधवार को कहा कि वह उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिजली वितरण का लाइसेंस निजी कंपनियों को जारी करने के सरकार के किसी भी कदम का विरोध करेगा।

एआईपीईएफ (ऑल पावर इंजीनियर्स फेडरेशन) के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने एक बयान में कहा, ‘‘अडाणी पावर की कंपनी अडाणी जेवर इलेक्ट्रिकल कंपनी लिमिटेड ने हाल ही में नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिजली वितरण का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश के विद्युत विनियामक आयोग में आवेदन किया है।’’

उन्होंने कहा कि अगर नोएडा और ग्रेटर नोएडा या उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अधिकार क्षेत्र में किसी अन्य स्थान पर किसी निजी कंपनी को बिजली वितरण लाइसेंस देने का प्रयास किया जाता है, तो एआईपीईएफ के सदस्य इसका कड़ा विरोध करेंगे।

दुबे ने कहा कि हाल ही में महाराष्ट्र में तीन सरकारी स्वामित्व वाली बिजली कंपनियों की यूनियनों ने सरकार के इसी तरह के कदम के विरोध में 72 घंटे की हड़ताल की। ऊर्जा विभाग की भी जिम्मेदारी संभाल रहे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और सूचित किया कि राज्य सरकार का किसी भी सरकारी स्वामित्व वाली बिजली उपक्रमों का निजीकरण करने का कोई इरादा नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘अडाणी समूह ने नवी मुंबई और टॉरेंट पावर ने पुणे और नागपुर में लाइसेंस के लिए आवेदन किये हैं।’’

दुबे ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार बिजली वितरण के लिए समानांतर लाइसेंस प्राप्त करने की मूल शर्त यह है कि निजी कंपनी ने जिस क्षेत्र के लिये लाइसेंस मांगा है, उनके पास अपने स्वयं के सबस्टेशन और लाइन का नेटवर्क होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सदस्यों की मांग है कि महाराष्ट्र सरकार की तरह, उत्तर प्रदेश सरकार को भी किसी भी राज्य वितरण उपक्रमों का निजीकरण नहीं करने का आश्वासन देना चाहिए।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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