नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) वेदांता समूह की अनुषंगी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (एचजेडएल) प्रवर्तक कंपनी वेदांता लिमिटेड की विदेशी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण प्रस्ताव पर सरकार के साथ मतभेद दूर करने के लिए खान मंत्रालय से संपर्क साधने की तैयारी में है।
एचजेडएल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अरुण मिश्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस बारे में खान मंत्रालय के साथ बैठक जल्द ही होने की उम्मीद है।
लगभग दो दशक पहले निजीकरण के बाद एचजेडएल में सरकार की हिस्सेदारी 29.54 प्रतिशत पर बनी हुई है। वेदांता लिमिटेड की विदेशी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण को लेकर सरकार की तरफ से कुछ चिंताएं जाहिर की गई हैं।
एक सूत्र ने कहा कि हिंदुस्तान जिंक के निदेशक मंडल में शामिल तीनों सरकारी निदेशकों को इस प्रस्ताव पर आपत्ति है।
इस बारे में पूछे जाने पर मिश्रा ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘कंपनी के अल्पांश शेयरधारकों की टिप्पणियां समाचारपत्रों में पढ़ने को मिल रही हैं। मैं किसी से भी व्यक्तिगत तौर पर नहीं मिला हूं। उनसे मिलने और उनकी राय जानने के बाद ही मैं कोई टिप्पणी कर सकता हूं।’’
अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता ने पिछले महीने कहा था कि वह अपनी वैश्विक जिंक परिसंपत्तियों 298.1 करोड़ डॉलर के नकद सौदे में हिंदुस्तान जिंक को बेचने जा रही है।
हालांकि, इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे शेयरधारकों का कहना है कि जब दोनों कंपनियों का स्वामित्व वेदांता के ही पास है तो विदेशी परिसंपत्तियों की बिक्री की कोई जरूरत नहीं है। वेदांता के पास हिंदुस्तान जिंक की 64.92 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
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