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Sunday, 22 March, 2026
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पश्चिम एशिया संघर्ष, रुपये में गिरावट से बीते सप्ताह सभी तेल-तिलहन में कीमतों में सुधार

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नयी दिल्ली, 22 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में युद्ध के माहौल के कारण बढ़ती आपूर्ति चिंताओं तथा डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने के साथ-साथ आवक घटने से देश के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह लगभग सभी खाद्य तेल-तिलहनों की कीमतों में मजबूती का रुख रहा। इन कारणों की वजह से सरसों, सोयाबीन एवं मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल की कीमतें मजबूती दर्शाती बंद हुईं।

शनिवार को ‘ईद’ के कारण बाजार बंद रहे।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि विदेशों में पिछले सप्ताह भी बाजार मजबूत हुआ। युद्ध से पहले के 1,200 डॉलर प्रति टन के आसपास की कीमत के मुकाबले युद्ध भड़कने के बाद सोयाबीन डीगम तेल का दाम बढ़कर 1,325-1,330 डॉलर प्रति टन हो गया है। युद्ध बढ़ने के बीच खाद्य तेल एवं रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित रहने की आशंकाओं से भी खाद्य तेल कीमतों में उछाल आया। बीते सप्ताह डॉलर के मुकाबले रुपया भी अपने सर्वकालिक निचले स्तर 93.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये की इस गिरावट ने आयात को और महंगा बना दिया है। आयात के लिए अर्जेन्टीना से मालवहन का भाड़ा जो युद्ध के पहले 70-75 डॉलर प्रति टन था वह अब बढ़कर लगभग 140 डॉलर प्रति टन हो चला है। रुपये के हिसाब से मालभाड़े में 6-6.50 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है। उसपर आयातित खाद्य तेल के बीमा की लागत भी बढ़ गई है। बाजार में किसान आवक भी कम ला रहे हैं। इन सभी परिस्थितियों के बीच खाद्य तेलों के दाम में उछाल आया।

उन्होंने कहा कि अपने पिछले सप्ताह के अधिकतम 14 लाख बोरी के मुकाबले बीते सप्ताह सरसों की आवक लगभग 10 लाख बोरी रह गई। किसान रोक-रोक कर अपना माल बेच रहे हैं। उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी अच्छा दाम मिल रहा है। आज की परिस्थितियों में उन समीक्षकों को अपने उन तर्कों पर मौजूदा परिस्थिति में फिर से गौर करना चाहिये कि- ‘खाद्य तेलों के दाम बढ़ने से मंहगाई बढ़ती है’- कितना उचित है।

सूत्रों ने कहा कि मौजूदा स्थिति में सरसों का उत्पादन अधिक है, किसानों को एमएसपी से दाम भी अधिक मिल रहे हैं। पश्चिम एशिया युद्ध के कारण आयातित खाद्य तेलों के दाम आसमान छू रहे हैं। इस परिस्थिति में देशी तिलहन की वजह से भारत इस मामले में ठीक स्थिति में है। सरसों के रिफाइंड भी बन रहे हैं। इसकी मांग भी है। इन्हें देखते हुए कहा जा सकता है कि उत्पादन बढ़ाना और देशी तेल-तिलहन का बाजार बनाना ही उचित कदम हो सकता है। आज की युद्ध जैसी परिस्थिति में, खाद्य तेल जैसी आम उपभोग वाली संवेदनशील खाद्य वस्तु के लिए लगभग 60 प्रतिशत आयात पर निर्भरता देश की संप्रभुता के लिए खतरनाक है।

दूसरी ओर, इस बात को भी समझना चाहिये, कि आज उन समीक्षकों की बोली क्यों नहीं सुनाई दे रही जो खाद्य तेलों की महंगाई का रोना रोने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। युद्ध ने खाद्य तेलों के दाम को भड़का दिया है फिर इस महंगाई पर कौन काबू करेगा? क्या इसका जवाब देशी तेल-तिलहनों का उत्पादन बढ़ाना नहीं है?

सूत्रों ने कहा कि युद्ध के कारण सोयाबीन तेल की आपूर्ति की समस्या हो सकती है। इसलिए सरकार को सोयाबीन, सरसों, मूंगफली जैसे तिलहनों का स्टॉक बनाकर रखने की जरूरत है जो कीमतों के असामान्य होने की स्थिति में काम आयेंगे। हो सके तो सरकार को बोनस देकर भी सरसों को खरीद लेना चाहिये क्योंकि मूंगफली, सरसों जैसे खाद्य तेलों का कोई विकल्प भी नहीं है।

सूत्रों ने कहा कि बिनौले की आवक कम हो रही है और सोयाबीन रिफाइंड से बिनौला तेल का दाम लगभग 10 रुपये किलो नीचे है। इसलिए इसकी खाद्य कंपनियों में अच्छी मांग भी है।

सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 250 रुपये के सुधार के साथ 6,950-6,975 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 700 रुपये के सुधार के साथ 14,600 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 80-80 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,430-2,530 रुपये और 2,430-2,575 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 50-150 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 5,700-5,750 रुपये और 5,300-5,450 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 750 रुपये के सुधार के साथ 16,300 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 800 रुपये के सुधार के साथ 15,700 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 1,250 रुपये के सुधार के साथ 13,200 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

मूंगफली तिलहन का दाम भी 250 रुपये के सुधार के साथ 7,250-7,725 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 650 रुपये के सुधार के साथ 17,550 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 90 रुपये के सुधार के साथ 2,770-3,070 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में कारोबारी धारणा में आम मजबूती के रुख के अनुरूप, सीपीओ तेल का दाम 550 रुपये के उछाल के साथ 13,600 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 650 रुपये के उछाल के साथ 15,400 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 650 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 14,350 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

तेजी के आम रुख के अनुरूप, बिनौला तेल का दाम 650 रुपये की मजबूती दर्शाता 14,700 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

भाषा राजेश

अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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