नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) खनन क्षेत्र के दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि दिवालिया हो चुकी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के लिए उसकी संशोधित बोली को अदाणी समूह के प्रस्ताव से बेहतर होने के बावजूद खारिज कर दिया गया।
अदाणी समूह के अधिग्रहण प्रस्ताव को स्वीकार करने के कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) के फैसले को चुनौती देते हुए वेदांता ने अपनी याचिका में कहा कि उसकी बोली कुल मूल्य के मामले में अदाणी से लगभग 3,400 करोड़ रुपये अधिक है। साथ ही वर्तमान मूल्य के आधार पर गणना के मामले में भी यह अदाणी की बोली से करीब 500 करोड़ रुपये ज्यादा है।
वेदांता ने अदालत को बताया कि उसने अक्टूबर, 2025 में जमा की गई अपनी योजना में सुरक्षित वित्तीय लेनदारों को 3,770 करोड़ रुपये का तत्काल नकद भुगतान और शेष 3,100 करोड़ रुपये एक साल के भीतर देने का प्रस्ताव दिया था।
इसके बाद, नवंबर, 2025 में कंपनी ने एक संशोधित प्रस्ताव भेजा, जिसमें तत्काल नकद भुगतान को बढ़ाकर 6,563 करोड़ रुपये और इक्विटी निवेश को 800 करोड़ रुपये करने की पेशकश की गई।
हालांकि, सीओसी ने अदाणी समूह की 14,535 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी। कर्जदाताओं का तर्क था कि अदाणी समूह लगभग 6,000 करोड़ रुपये का तत्काल नकद भुगतान कर रहा है और बाकी राशि का भुगतान दो साल के भीतर करने का वादा किया है, जबकि वेदांता की भुगतान अवधि पांच साल तक लंबी थी।
वेदांता ने आरोप लगाया है कि कर्जदाताओं ने उसकी बोली खारिज करते समय ‘मनमाना’ व्यवहार किया और इस प्रक्रिया में दिवाला प्रक्रिया का प्रबंधन करने वाले अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
वेदांता ने कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) यह समझने में विफल रहा कि बैंकों के पास फैसला लेने का जो अधिकार है, वह अंतिम या मनमाना नहीं हो सकता। बैंकों को अपनी पसंद का ठोस आधार बताना होगा, और अगर फैसला भेदभावपूर्ण है, तो उसे बदला जा सकता है।
वेदांता ने शीर्ष अदालत से अनुरोध किया है कि वह अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के उस आदेश पर तत्काल रोक लगाए, जिसने अदाणी की योजना के क्रियान्वयन को रोकने से इनकार कर दिया था।
वेदांता का तर्क है कि यदि एक बार अदाणी समूह ने कंपनी का प्रबंधन संभाल लिया और शेयरों का हस्तांतरण हो गया, तो इस स्थिति को वापस पलटना असंभव होगा और उसकी अपील केवल कागजी बनकर रह जाएगी।
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सुमित अजय
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