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Sunday, 1 February, 2026
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यूनियन बजट: कैंसर की दवाएं और सोलर पैनल होंगे सस्ते, सीफूड निर्यातकों को फायदा

आम लोग कीमतों में बड़े बदलाव के बजाय यह बजट चुनिंदा उद्योगों और वित्तीय बाज़ारों को संकेत देता दिखता है — दिप्रिंट की एक झलक.

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नई दिल्ली: रविवार को संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट में स्वच्छ ऊर्जा, रणनीतिक खनिज, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, विमानन, स्वास्थ्य और निर्यात जैसे प्राथमिक क्षेत्रों की लागत कम की गई है. वहीं, डेरिवेटिव ट्रेडिंग और गैर-प्राथमिक आयात पर चुनिंदा तौर पर खर्च बढ़ाया गया है.

यह रुझान आम उपभोक्ता कीमतों में व्यापक बदलाव के बजाय उद्योग और वित्तीय बाज़ारों को लक्षित संकेत देने जैसा है.

इस रिपोर्ट में दिप्रिंट बजट के बाद सस्ती और महंगी हुई चीज़ों की आइटम-वाइज़ जानकारी दे रहा है. यह जानकारी केवल सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी), उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) और लेन-देन करों में घोषित बदलावों पर आधारित है.

सबसे पहले जानते हैं कि क्या सस्ता हुआ

रणनीतिक खनिज और स्वच्छ ऊर्जा

रणनीतिक खनिज और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में कई अहम इनपुट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी शून्य कर दी गई है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा, बैटरी और रणनीतिक खनिजों की लागत घटेगी.

दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाला मोनाजाइट, सोलर ग्लास बनाने में उपयोग होने वाला सोडियम एंटिमोनेट, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए लिथियम-आयन सेल निर्माण में लगने वाले निर्दिष्ट कैपिटल गुड्स और रणनीतिक खनिजों की प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स व कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी शून्य कर दी गई है.

परमाणु ऊर्जा उपकरण

परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए ज़रूरी सभी सामान—जैसे रिएक्टर से जुड़े उपकरण और एब्जॉर्बर रॉड—को पूरी तरह बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई है. यह छूट 2035 तक लागू रहेगी और प्लांट की क्षमता पर निर्भर नहीं होगी.

उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स

इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता निर्माण क्षेत्र में सरकार ने माइक्रोवेव ओवन बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ निर्दिष्ट पुर्ज़ों को बेसिक कस्टम ड्यूटी से मुक्त कर दिया है. इसका उद्देश्य घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाना है, यानी आयात पर निर्भरता कम करना, स्थानीय रोज़गार पैदा करना और जीडीपी में योगदान बढ़ाना.

नागरिक और रक्षा विमानन

बजट के तहत विमान निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विमान के पुर्ज़ों और इंजनों को कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई है. रक्षा क्षेत्र में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) के लिए इस्तेमाल होने वाले विमान पुर्ज़ों के कच्चे माल को भी छूट दी गई है. इससे एयरलाइंस की मरम्मत और इंजन ओवरहॉल की लागत घटेगी.

दवाएं और स्वास्थ्य

कम से कम 17 और दवाओं—जिनमें ज़्यादातर कैंसर से जुड़ी हैं को पूरी तरह बेसिक कस्टम ड्यूटी से मुक्त किया गया है. इसके अलावा, सात अधिसूचित दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली विशेष चिकित्सा उद्देश्य वाली दवाओं, मेडिसिन और खाद्य पदार्थों पर भी आयात शुल्क की छूट बढ़ाई गई है.

व्यक्तिगत आयात

व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए आयात होने वाले शुल्क योग्य सामान पर कस्टम ड्यूटी 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है. यह बदलाव अप्रैल 2026 से लागू होगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और व्यक्तिगत आयात की लागत कम होगी.

निर्यात आधारित क्षेत्र

निर्यात के लिए सीफूड प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले इनपुट्स पर ड्यूटी-फ्री आयात की सीमा को पिछले साल के FOB (फ्री ऑन बोर्ड) निर्यात मूल्य के 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया है.

वहीं, ड्यूटी-फ्री आयातित इनपुट्स से बने लेदर गारमेंट्स, फुटवियर, शू अपर और टेक्सटाइल गारमेंट्स के निर्यात की समय-सीमा को छह महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है. इससे अनुपालन का दबाव और वर्किंग कैपिटल पर बोझ कम होगा.

अब जानते हैं कि क्या महंगा हुआ

फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग

डेरिवेटिव मार्केट में लेन-देन की लागत बढ़ा दी गई है. फ्यूचर्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है. वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम और ऑप्शंस एक्सरसाइज़ पर STT बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है. इससे हाई-फ्रीक्वेंसी और सट्टात्मक डेरिवेटिव ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी.

चुनिंदा केमिकल और उपभोक्ता आयात

साबुन, डिटर्जेंट, बैटरी, टेक्सटाइल, केमिकल और फूड प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड पर अब 7.5 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी लगेगी. पहले इस पर कोई शुल्क नहीं था.

छतरियों और उनके कुछ पुर्ज़ों और एक्सेसरीज़ पर भी कस्टम ड्यूटी बढ़ाई गई है, या तो अधिक एड वेलोरम ड्यूटी के ज़रिए या प्रति यूनिट तय शुल्क के रूप में.

पुरानी छूट की वापसी

कई लंबे समय से चली आ रही कस्टम ड्यूटी छूट को वापस ले लिया गया है. इनमें कुछ केमिकल्स, औद्योगिक इनपुट्स, मशीनरी और कंपोनेंट्स, चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स, प्रिंटिंग उपकरण और औद्योगिक इंटरमीडिएट्स शामिल हैं. जहां ये छूट खत्म हो गई हैं, वहां आयात लागत बढ़ेगी, भले ही मुख्य टैरिफ दरें बदली न दिखें.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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