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Saturday, 5 April, 2025
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सार्वजनिक वित्त पर राजनीति नहीं होनी चाहिए: सीतारमण

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नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक वित्त पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए क्योंकि इसका केंद्र और राज्यों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।

सीतारमण ने यहां ‘नीति एनसीएईआर (नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लॉयड इकनॉमिक रिसर्च) राज्य आर्थिक मंच’ पोर्टल की शुरुआत करते हुए कहा कि कर्ज वित्तीय सूझबूझ के साथ लिया जाना चाहिए और आगे चलकर यह बोझ नहीं बनना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘पैसे जुटाना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि अपने कर्ज का प्रबंधन करना। अगर मैं जनता के लिए परियोजनाएं या योजनाएं देने की घोषणा करती हूं तो इस मामले में अच्छी हो सकती हूं…लेकिन इसके लिए अगर मेरे पास संसाधन नहीं हैं तो इसका कोई फायदा नहीं है…।’’

सीतारमण ने कहा कि उधार लेते समय सभी वास्तविकताओं को ध्यान में रखना चाहिए। दुनिया भर में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए उधार लेने का एक लोभ है।

उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, उस तरह उधार लेने को नियंत्रित करने के लिए भी बड़ा संघर्ष करना पड़ता है। देश इतने कर्ज में डूबे हुए हैं कि स्वीकार्य स्तर पर आने में भी एक पीढ़ी लग जाएगी, आदर्श स्तर की तो बात ही छोड़ दीजिए।’’

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘जब देश के वित्त की बात आती है, जब केंद्र सरकार या राज्यों के वित्त की बात आती है, तो इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।’’

सीतारमण ने जीएसटी परिषद में विचार-विमर्श का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी लाइन से परे राज्यों के वित्त मंत्री आम आदमी पर बोझ न पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए राजस्व बढ़ाने पर निर्णय लेते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए, जब आप राजस्व की बात करते हैं, तो….इसके लिए हमें जिम्मेदार होना चाहिए।’’

सीतारमण ने प्रति व्यक्ति आय के संबंध में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष 14 राज्य तेजी से काम कर रहे हैं, लेकिन उनमें से कुछ पर भारी कर्ज भी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि खासकर जब बात राज्यों की आती थी, कुछ साल पहले सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के आंकड़ों को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया जाता था।

उन्होंने कहा, ‘‘और मुझे लगता है कि अब एमओएसपीआई एक ऐसी अवस्था में पहुंच गया है जहां आज लोग इसके आंकड़ों का सवाल नहीं उठाते हैं…।’’

कार्यक्रम में नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बी वी आर सुब्रह्मण्यम ने कहा कि अब तक 12 राज्यों ने अपना ‘दृष्टि दस्तवेज’ तैयार कर लिया है।

‘नीति एनसीएईआर राज्य आर्थिक मंच’ पोर्टल वित्त वर्ष 2022-23 तक तीन दशक का राज्यों के सामाजिक, आर्थिक और राजकोषीय मापदंडों पर आंकड़ें उपलब्ध कराएगा।

इसके अलावा, पोर्टल 28 राज्यों का एक वृहद और राजकोषीय परिदृश्य प्रदान करेगा, जो जनसांख्यिकी, आर्थिक संरचना और सामाजिक-आर्थिक और राजकोषीय संकेतकों पर आधारित होगा।

भाषा रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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