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Wednesday, 11 March, 2026
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निर्देश के बावजूद मामला सूचीबद्ध नहीं करने से उच्चतम न्यायालय नाखुश

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नयी दिल्ली, 28 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अपनी अवकाशकालीन पीठों के आदेशों के बावजूद कोर्ट रजिस्ट्री की तरफ से मामले सूचीबद्ध नहीं किए जाने पर मंगलवार को नाखुशी जताते हुए कहा कि मामलों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सूचीबद्ध किया जाएगा।

न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि उसने सोमवार को एक मामले को सुनवाई के लिए मंगलवार को सूचीबद्ध करने को कहा था लेकिन रजिस्ट्री ने कह दिया है कि उसे सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा।

पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से कहा, ‘‘हम इसे खुली अदालत में नहीं कहना चाहते थे लेकिन यह एक सच्चाई है। कल हमने एक अपवाद करते हुए एक मामले को आज के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था। लेकिन रजिस्ट्री ने कहा कि वह मामले को सूचीबद्ध नहीं करेगा। हम इस बारे में कुछ और नहीं कहना चाहते हैं।’’

सिंघवी बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (अडानी) द्वारा दायर एक याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग कर रहे थे।

पीठ ने कहा कि अवकाश के दौरान मामले सूचीबद्ध करने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया है और सिंघवी को रजिस्ट्रार से संपर्क करने के लिए कहा। न्यायालय ने कहा कि यदि सूचीबद्धता के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया जाता है तो वह इस पर विचार कर सकती है।

सिंघवी ने कहा कि न्यायालय के विवेक को रजिस्ट्री द्वारा सीमित नहीं किया जा सकता है और वह अपवाद के तौर पर मामले को तत्काल सूचीबद्ध कर सकती है।

इसी अवकाश पीठ ने सोमवार को मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनके परिवार के सदस्यों को सुरक्षा देने के संबंध में दायर एक याचिका को सुनवाई के लिए मंगलवार को सूचीबद्ध करने का आदेश भी दिया था। हालांकि पीठ के आदेश के बावजूद मामले को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया।

अंबानी परिवार को सरकार की तरफ से सुरक्षा देने को एक जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी गई थी। इस पर त्रिपुरा उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ केंद्र ने न्यायालय में याचिका दायर की है।

भाषा पाण्डेय प्रेम

प्रेम

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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