नयी दि्ल्ली, 31 जनवरी (भाषा) पीएम गति शक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं जैसे पथ-प्रवर्तक कदमों से भारत की आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिलेगा। वित्त वर्ष 2022-23 की आर्थिक समीक्षा में यह अनुमान जताया गया है।
मंगलवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, पिछले आठ वर्षों में सड़कों, रेल मार्गों एवं जलमार्गों में अप्रत्याशित विस्तार देखने को मिला है। इस दौरान बंदरगाहों और हवाई अड्डों को भी उन्नत किया गया है।
आर्थिक समीक्षा कहती है कि भारत में लॉजिस्टिक लागत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 14-18 प्रतिशत के दायरे में रही है जबकि इसका वैश्विक मानक आठ प्रतिशत का है।
सरकार वर्ष 2021 में पीएम गति शक्ति- राष्ट्रीय मास्टर प्लान लेकर आई थी। इसके जरिये ढांचागत परियोजनाओं से संबंधित विभागीय जकड़नों को खत्म कर उनका समग्र एवं एकीकृत नियोजन करने के साथ क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। इस तरह मल्टी-मॉडल और अंतिम गंतव्य तक पहुंच सुविधा बहाल करने का इरादा है।
राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनआईपी) में सड़क, रेल, हवाई अड्डा, बंदरगाह, सार्वजनिक परिवहन, जलमार्ग एवं लॉजिस्टिक ढांचे को सात ‘इंजन’ बताते हुए उन्हें पीएम गति शक्ति पहल में समायोजित किया जाना है।
आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, विभिन्न ढांचागत परियोजनाओं का नियोजन केंद्र एवं राज्यों के स्तर पर अधिक समग्रता और सम्मिलन के साथ करने में सितंबर, 2022 में घोषित राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति से मदद मिलेगी।
समीक्षा कहती है, ‘‘इन सभी प्रयासों से ढांचागत क्षेत्र के मुश्किल सफर से जुड़ी खामियों को दूर किए जाने की उम्मीद है। इस सफर में केंद्र, राज्य, स्थानीय निकाय और निजी क्षेत्र सभी की भागीदारी है।’’
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