नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने मंगलवार को म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए गिफ्ट कार्ड या गिफ्ट प्रीपेड भुगतान कार्ड (पीपीआई) शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य नए निवेशकों को शामिल करके वित्तीय समावेश को बढ़ावा देना है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि इसके तहत, गिफ्ट पीपीआई का खरीदार इसे किसी प्राप्तकर्ता को उपहार में दे सकता है, जो इसका उपयोग म्यूचुअल फंड यूनिट खरीदने के लिए कर सकता है।
इन पीपीआई में निवेश केवल भारतीय बैंक खाते से इलेक्ट्रॉनिक बैंक ट्रांसफर (यूपीआई) के माध्यम से किया जा सकेगा। इनकी वैधता जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक रहेगी।
सेबी ने गिफ्ट पीपीआई के माध्यम से किए गए निवेश के लिए प्रति निवेशक प्रति वित्त वर्ष 50,000 रुपये की सीमा का सुझाव दिया है।
नियामक ने कहा, ‘‘संपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) की ओर से आरटीए (रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट) प्रत्येक निवेशक द्वारा प्रति वित्त वर्ष में प्रति एएमसी गिफ्ट पीपीआई, ई-वॉलेट और नकद के माध्यम से किए गए निवेश की राशि पर नजर रखेंगे। यदि गिफ्ट पीपीआई भुनाकर होने वाला लेनदेन 50,000 रुपये से अधिक हो जाता है, तो आरटीए लेनदेन को अस्वीकार कर देगा और पीपीआई का अंकित मूल्य जारीकर्ता के एस्क्रो खाते में वापस कर दिया जाएगा।’’
परंपरागत रूप से, गिफ्ट कार्ड और प्रीपेड समाधान का उपयोग खुदरा खरीदारी में किया जाता रहा है और समय के साथ डिजिटल भुगतान, त्वरित डिलिवरी और बेहतर सुरक्षा के कारण इनका उपयोग बढ़ा है।
सेबी को एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) से म्यूचुअल फंड इकाइयों में निवेश के साधन के रूप में गिफ्ट पीपीआई की अनुमति देने पर विचार करने के प्रस्ताव मिले थे। उस पर गौर करने के बाद सेबी ने परामर्श पत्र जारी किया है।
सेबी के अनुसार, “गिफ्ट कार्ड/गिफ्ट पीपीआई से म्यूचुअल फंड क्षेत्र में नए निवेशकों को शामिल करके वित्तीय समावेश में सुधार होने की उम्मीद है।”
बाजार नियामक ने 14 अप्रैल तक प्रस्तावों पर जनता से सुझाव मांगे हैं।
भाषा रमण अजय
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