नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बृहस्पतिवार को फर्स्ट ओवरसीज कैपिटल को दो साल के लिए कोई भी नया काम लेने से रोक दिया और गलत जानकारी देने और अंडरराइटिंग सीमाओं का उल्लंघन करने सहित कई उल्लंघनों के लिए 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
नियामक ने फर्स्ट ओवरसीज कैपिटल लिमिटेड (एफओसीएल) को दो साल की अवधि के लिए प्रतिभूति बाजारों में कारोबार करने से भी रोक दिया है।
अपने 43-पृष्ठ के आदेश में, सेबी ने पाया कि एफओसीएल ने गलत और भ्रामक जानकारी दी हैं, अंडरराइटिंग प्रतिबद्धताओं के तहत प्राप्त प्रतिभूतियों के बारे में सेबी को सूचित करने में विफल रही, अर्धवार्षिक रिपोर्ट दाखिल करने में देरी की, प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों का एनआईएसएम प्रमाणन सुनिश्चित नहीं किया और अपनी वेबसाइट पर ट्रैक रिकॉर्ड का खुलासा नहीं किया।
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य (डब्ल्यूटीएम) अमरजीत सिंह ने आदेश में कहा, ‘‘नोटिस प्राप्तकर्ता (फर्स्ट ओवरसीज कैपिटल लिमिटेड) वित्त वर्ष 2018-19 से निवल संपत्ति की आवश्यकताओं का पालन नहीं कर रहा है और सैट (प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण) के निर्देशों के बाद ही नोटिस प्राप्तकर्ता ने अनुपालन किया है।’’
उन्होंने कहा कि निवल संपत्ति की आवश्यकता कोई कागजी शर्त नहीं है जिसे आवेदकों को सेबी से पंजीकरण के समय पूरा करना होता है।
एमबी नियमों का उल्लंघन करने के लिए एफओसीएल पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अप्रैल, 2021 से मार्च, 2022 तक एफओसीएल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान, सेबी ने पाया कि नोटिस प्राप्तकर्ता पांच करोड़ रुपये की निवल संपत्ति बनाए रखने में विफल रहा है, और इसलिए, उसने एमबी (मर्चेंट बैंकर्स) नियमों का उल्लंघन किया है।
इसके बाद, नियामक ने कंपनी के खिलाफ जांच कार्यवाही शुरू की और मानदंडों के उल्लंघन के लिए एफओसीएल के पंजीकरण प्रमाणपत्र को दो महीने के लिए निलंबित कर दिया।
भाषा राजेश राजेश अजय
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