नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डी के यादव ने सोमवार को कहा कि सरकार सक्रियता के साथ किसानों को अमेरिकी शुल्क के प्रभाव से बचाने के लिए वैकल्पिक निर्यात गंतव्यों और आयात प्रतिस्थापन रणनीतियों की खोज कर रही है।
यादव ने अमेरिका स्थित वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन द्वारा भारत में पहली बार आयोजित कार्यक्रम ‘डायलॉग नेक्स्ट’ के बारे में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्प तलाश रही है। जहां तक निर्यात का सवाल है, संबंधित मंत्रालय पहले से ही विभिन्न वस्तुओं के निर्यात के लिए वैकल्पिक देशों की तलाश कर रहे हैं।’’
उन्होंने आनुवंशिक रूप से संशोधित सोयाबीन और मक्का के साथ-साथ दूध और दुग्ध उत्पादों के आयात पर कहा कि सरकार का ‘एक बहुत ही स्पष्ट रुख’ है और वह वैकल्पिक आयात स्रोतों की पहचान कर रही है।
यादव ने कहा कि वर्तमान में आयात की जाने वाली वस्तुओं के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी अपनी व्यवस्था में भी, हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि किस प्रकार के आयात होते हैं और आत्मनिर्भर कैसे बनें। देश के सर्वोच्च पद से लेकर सभी विभागों तक ये निर्णय इसलिए लिए जा रहे हैं ताकि हम अपनी उत्पादित वस्तुओं पर अधिक निर्भर रहें और किसानों को अच्छे दाम मिल सकें।’’
यादव ने कहा कि पिछले दो-तीन महीनों में जिन कार्यक्रमों पर चर्चा हुई है, उनमें उन वस्तुओं में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है जिन पर भारत अमेरिका और अन्य देशों पर बहुत अधिक निर्भर है।
आईसीएआर अधिकारी ने आश्वासन दिया कि किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता बना हुआ है।
भाषा राजेश राजेश रमण
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