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Sunday, 22 March, 2026
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महिला-पुरुष अंतर पाटने पर काम कर रहा है एसबीआई, महिला कर्मियों की संख्या 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य

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नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने लैंगिक विविधता को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीति तैयार की है। बैंक का लक्ष्य पांच साल के भीतर अपने महिला कार्यबल को बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक करने का है।

एसबीआई के उप प्रबंध निदेशक (मानव संसाधन) और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) किशोर कुमार पोलुदासु ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘अगर हम अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की बात करें, तो महिलाएं लगभग 33 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल मिलाकर, वे कुल कार्यबल का 27 प्रतिशत हैं। इसलिए, हम इस प्रतिशत को बेहतर बनाने की दिशा में काम करेंगे ताकि विविधता और बेहतर हो सके।’’

उन्होंने कहा कि बैंक इस अंतर को पाटने और अपने कार्यबल में 30 प्रतिशत महिलाओं के अपने मध्यम अवधि के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कदम उठा रहा है।

एसबीआई के कुल कर्मचारियों की संख्या 2.4 लाख से अधिक है, जो देश के किसी भी संगठन और बैंकिंग उद्योग में सबसे अधिक है।

उन्होंने आगे कहा कि बैंक एक ऐसा कार्यस्थल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जहां महिलाएं सभी स्तरों पर आगे बढ़ सकें और लक्षित कार्यक्रमों के माध्यम से एसबीआई नेतृत्व, कार्य-जीवन संतुलन और कार्यस्थल पर सम्मान को बढ़ावा देता है।

बैंक द्वारा किए गए कुछ महिला-केंद्रित उपायों पर प्रकाश डालते हुए पोलुदासु ने कहा कि बैंक कामकाजी माताओं के लिए ‘क्रेश’ भत्ता प्रदान करता है। इसके अलावा मातृत्व अवकाश या विस्तारित बीमारी अवकाश से लौटने वाली महिला कर्मचारियों की सहायता के लिए परिवार संपर्क और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाता है।

उन्होंने कहा कि ‘एम्पावर हर’ हमारी एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य संरचित नेतृत्व और कोचिंग सत्रों के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व के लिए पहचानना, मार्गदर्शन देना और तैयार करना है। इससे नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकेगा और भविष्य की शीर्ष महिला अधिकारियों की एक मजबूत श्रृंखला तैयार हो सकेगी।

महिला कर्मचारियों की विशिष्ट स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, बैंक ने स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जांच, गर्भवती कर्मचारियों के लिए पोषण भत्ता और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के टीकाकरण अभियान जैसे केंद्रित कार्यक्रम शुरू किए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बैंक में कार्यरत महिलाओं और लड़कियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी कई पहल की जा रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बैंक अपनी महिला कर्मचारियों के लिए एक समावेशी, सुरक्षित वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि वे अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सकें।

यह इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि एसबीआई की देश भर में 340 से अधिक ऐसी शाखाएं हैं जिनमें केवल महिला कर्मचारी कार्यरत हैं और भविष्य में यह संख्या और बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि सभी भौगोलिक क्षेत्रों और स्तरों पर महिला कर्मचारियों का अच्छा प्रतिनिधित्व है, जो समावेशन के प्रति बैंक की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि बैंक के पास आईटी विशेषज्ञ अधिकारियों का एक गतिशील और कुशल समूह है जो बैंकिंग कार्यों की सुरक्षा, दक्षता और नवोन्मेषण सुनिश्चित करता है।

संपत्ति के आकार के मामले में एसबीआई दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में से एक है और विभिन्न संस्थाओं द्वारा बैंक को सर्वश्रेष्ठ नियोक्ता के रूप में मान्यता दी गई है।

उन्होंने कहा कि बैंक परिवर्तन के मामले में सबसे आगे है और प्रक्रियाओं, प्रौद्योगिकी और ग्राहक अनुभव में नवोन्मेषण को बढ़ावा देने के लिए अपने बहुमुखी ढांचे का लाभ उठा रहा है।

उन्होंने कहा कि नई प्रौद्योगिकियों को अपनाकर और ग्राहकों की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप, एसबीआई बदलते व्यावसायिक मॉडल के प्रति चुस्त और उत्तरदायी बना हुआ है और लगातार पीछे रहने के बजाय गति बनाए रखने पर काम करता है।

भाषा अजय अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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