नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के अध्यक्ष और सीईओ हरदीप सिंह बरार ने सोमवार को कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत आयातित कारों पर सीमा शुल्क में कटौती से भारत में लक्जरी कार खंड के विकास को गति मिल सकती है, जो वर्तमान में काफी कम है।
देश के कुल यात्री वाहन खंड में लक्जरी कारों की हिस्सेदारी मात्र एक प्रतिशत है।
बरार ने एक बयान में कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता एक ऐतिहासिक मील का पत्थर होगा, जो व्यापार का विस्तार करके और प्रौद्योगिकी व नवाचार के गहरे आदान-प्रदान को सक्षम बनाकर दोनों पक्षों को लाभ पहुंचाएगा।
उन्होंने कहा, ‘ऑटोमोटिव उद्योग के दृष्टिकोण से, हमें उम्मीद है कि एफटीए में संतुलित और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद प्रावधान शामिल किए जाएंगे, जो लक्जरी खंड में मांग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण को मजबूत करने में मदद करेंगे। वर्तमान भू-राजनीतिक संदर्भ में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।’
बरार ने कहा कि यदि पूरी तरह से निर्मित इकाइयों (सीबीयू) पर सीमा शुल्क कम किया जाता है, तो इससे भारत में लक्जरी कार बाजार के विस्तार में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया, ‘हालांकि वर्तमान में हमारी बिक्री में सीबीयू (आयातित इकाइयां) की हिस्सेदारी लगभग पांच प्रतिशत है, लेकिन ऐसा ढांचा हमें अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को व्यापक बनाने, विश्व स्तर पर लोकप्रिय मॉडल पेश करने और नए उत्पादों का परीक्षण करने की अनुमति देगा।’
अध्यक्ष ने कहा कि यदि मांग बढ़ती है, तो यह समय के साथ स्थानीय स्तर पर उत्पादन को और गहरा करने में भी मदद कर सकता है।
बरार ने कहा, ‘यह देखते हुए कि यात्री वाहन बाजार में लक्जरी वाहनों की हिस्सेदारी केवल एक प्रतिशत है, इससे व्यापक बाजार के खिलाड़ियों को प्रभावित किए बिना उपभोक्ताओं को लाभ होगा। यह भारत और यूरोपीय संघ दोनों के लिए वास्तव में फायदे का सौदा होगा।’
वर्तमान में, 40,000 अमेरिकी डॉलर से कम कीमत वाले आयातित यात्री वाहनों पर 70 प्रतिशत का बुनियादी सीमा शुल्क लगता है, जबकि 40,000 डॉलर से अधिक कीमत वाले वाहनों पर प्रभावी सीमा शुल्क 110 प्रतिशत है।
भाषा सुमित पाण्डेय
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