नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर (भाषा) खाद्य तेल उद्योग के प्रमुख संगठन साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने बृहस्पतिवार को घरेलू उत्पादन को बढाने के लिए आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) सरसों को पर्यावरणीय परीक्षण के लिए जारी करने की जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति की सिफारिश का स्वागत किया। एसईए ने कहा कि घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाना चाहिए।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के तहत आने वाली जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (जीईएसी) ने आनुवंशिक रूप से संशोधित सरसों के पर्यावरणीय परीक्षण के लिए इसके बीज जारी करने की सिफारिश की है, जिसके बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि यह इसकी व्यावसायिक खेती का मार्ग प्रशस्त करेगा।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने कहा, ‘‘यह स्वागत योग्य खबर है। हम 15 साल से अधिक समय से इस मामले पर लगे हैं। नई तकनीक का कोई भी विरोध, हमारी कोई मदद नहीं करेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें तिलहन के अपने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सभी उपलब्ध तकनीकों का उपयोग करना चाहिए ताकि हम खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकें।’’
सरकार ने अबतक (वर्ष 2002 में) व्यावसायिक खेती के लिए केवल एक जीएम फसल, बीटी कपास को मंजूरी दी है।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
