नयी दिल्ली, एक नवंबर (भाषा) विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, सीपीओ, पामोलीन और बिनौला तेल कीमतों में सुधार दिखा। जबकि मंडियों में सोयाबीन की आवक बढ़ने के कारण सोयाबीन तिलहन और सोयाबीन लूज (तिलहन फसलें) के भाव अपरिवर्तित बने रहे।
कारोबारी सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में लगभग 4.5 प्रतिशत की तेजी थी जबकि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात लगभग दो प्रतिशत मजबूत बंद हुआ था, जो फिलहाल लगभग 1.5 प्रतिशत तेज है।
सूत्रों ने बताया कि शादी विवाह के मौसम और जाड़े की मांग तथा विदेशी बाजारों में तेजी की वजह से सभी तेल-तिलहन कीमतों में सुधार दिखा।
सूत्रों ने कहा कि देश के एक प्रमुख तेल-तिलहन संगठन ने सरकार से मांग की है कि किसानों की मूंगफली, सोयाबीन सहित तमाम खरीफ फसलों के बाजार में आवक शुरू होने के मौके पर उन्हें बेहतर कीमत सुनिश्चित करने के लिए सरकार को आयातित खाद्य तेलों पर आयात शुल्क लगाना चाहिये। सूत्रों ने संगठन के इस कदम की तारीफ करते हुए कहा कि इन संगठनों को तब भी सरकार को ऐसे ही आगे बढ़कर परामर्श देना चाहिये था कि आयात के लिए कोटा निर्धारित न किया जाये क्योंकि इससे मंडियों में सूरजमुखी तेल के कम आपूर्ति की स्थिति पैदा होगी। उपभोक्ताओं को राहत देने के मकसद से सरकार ने यह कदम ऐसे वक्त में उठाया था जब विदेशों में दाम काफी टूटे हुए थे और लगभग आधे रह गये थे। कोटा निर्धारित होने की वजह से कोटे वाले हिस्से का तो आयात हो रहा है, पर बाकी आयात, आयात शुल्क के अदायगी की वजह से महंगा बैठने के कारण एकदम ठप पड़ गया।
इससे सूरजमुखी तेल के कम आपूर्ति की स्थिति पैदा हुई और खाद्य तेलों के दाम सस्ता होने के बजाय और बढ़ गये।
सूत्रों ने कहा कि मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में लगभग वर्ष 1990 में कच्चे पामतेल (सीपीओ) का उत्पादन लगभग 40-50 लाख टन का था जो वहां की सरकारों के समर्थन की वजह से इन दिनों लगभग 20 गुना बढ़ गया है। लेकिन हमारे देश में तिलहन उत्पादन में बहुत मामूली वृद्धि हुई है और हम आज भी अपनी जरुरत के लगभग 60 प्रतिशत खाद्य तेलों का आयात करते हैं।
सूत्रों ने कहा कि इन तेल संगठनों को उस वक्त भी सरकार को उपयुक्त कार्रवाई करने के लिए इस बात की सूचना देनी चाहिये थी जब सोची समझी साजिश के तहत वायदा कारोबार में आयात भाव के मुकाबले सीपीओ तेल का स्थानीय भाव लगभग पांच रुपये किलो नीचे चलाया जा रहा था। इस कदम से आयातक लगभग पूरी तरह से ध्वस्त हो गये और बैंकों से आयातकों द्वारा लिया गया भारी मात्रा में कर्ज डूब गया।
सूत्रों ने कहा कि सीपीओ का भाव काफी टूट चुका है और सबसे सस्ता होने की वजह से विदेशों में भी इस तेल की फिलहाल मांग है। इसके अलावा मलेशिया एक्सचेंज के मजबूत होने से सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में सुधार दर्ज हुआ।
सूत्रों ने कहा कि किसानों द्वारा नीचे भाव में अपनी उपज नहीं बेचने से सरसों और मूंगफली तेल- तिलहन कीमतों में सुधार आया। शिकॉगो एक्सचेंज की मजबूती की वजह से सोयाबीन तेल कीमतों में सुधार आया।
मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 7,250-7,270 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 6,895-6,960 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,100 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,575-2,835 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 14,950 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,280-2,410 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,350-2,465 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,800-20,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,480 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 14,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,800 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 9,000 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,280 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,750 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,800 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 5,310-5,360 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज 5,110-5,160 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश अजय
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