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Tuesday, 10 March, 2026
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सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अगुवा बनने के लिए 2डी सामाग्री के तेजी से विकास की जरूरत: नीति रिपोर्ट

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नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) नीति आयोग ने बृहस्पतिवार को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अग्रणी स्थान हासिल करने के लिए देश में चिप के लिए 2डी सामग्रियों के विकास को तेजी से आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

नीति आयोग ने ‘फ्यूचर फ्रंट क्वार्टरली इनसाइट्स’ श्रृंखला के चौथे संस्करण की अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2डी सामग्रियां पेंसिल की नोक से लगभग आठ लाख गुना छोटी होती हैं और पतली होने के बावजूद, ये स्टील से 200 गुना ज्यादा मजबूत होती हैं और तांबे की तुलना में अधिक कुशल बिजली सुचालक है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि द्वि-आयामी (2डी) सामग्रियों की दुनिया एक ऐसा क्षेत्र है जो सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग के भविष्य को नया आकार दे सकता है।

नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, ‘‘आपको लोगों, अनुसंधान एवं विकास, आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने और अंततः उत्पाद और विनिर्माण में निवेश करने की आवश्यकता है। मुझे लगता है कि हमें 2डी के लिए संपूर्ण परिवेश बनाने की आवश्यकता है।’’

ऐसा माना जा रहा है कि 2डी सामग्रियों में सिलिकॉन की जगह लेने की क्षमता है, जो वर्तमान में सभी सेमीकंडक्टर के निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री है। इसमें वर्तमान में उत्पादन में सबसे कम आकार के चिप की तुलना में 10 गुना छोटे चिप बनाने की क्षमता है।

सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अग्रणी बनने के लिए अभी भी प्रयास जारी हैं। ‘‘हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर बनाने के लिए 2डी सामग्रियों की क्षमता को समझने के लिए पहले से ही कुछ लोग जागरूक हो रहे हैं। इनमें अमेरिका, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया आदि शामिल हैं, जिन्होंने इस तकनीक में निवेश करना शुरू कर दिया है।

नीति फ्रंटियर टेक हब की मुख्य वास्तुकार देबजानी घोष ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के नियम बदल रहे हैं और आज वे उन चीजों के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं जिन्हें दुनिया ‘तकनीकी अवरोध बिंदु’ कहती है।

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया आपूर्ति श्रृंखलाओं, महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं, आपूर्ति श्रृंखलाओं के नियंत्रण और मानकों के नियंत्रण पर ध्यान दे रही है। प्रौद्योगिकी में, यदि आप मानक निर्धारित करते हैं तो आप नेतृत्व करते हैं, अन्यथा, आप अनुसरण करते हैं। ये तीन चीजे, आपूर्ति श्रृंखलाएं, मानक और गठबंधन, अवरोध बिंदुओं को परिभाषित कर रही हैं और यह भी परिभाषित कर रही हैं कि भू-राजनीतिक खेल पूरी तरह से कैसे आगे बढ़ता है।’’

घोष ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण अवरोध बिंदु सभी वैज्ञानिक और औद्योगिक प्रगति की नींव है, जो सेमीकंडक्टर के बिना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘पकड़ने की रणनीति बहुत मुश्किल हो जाती है। इसलिए जब आप सेमीकॉन जैसी तकनीकों के बारे में सोच रहे हों, तो आपको एक बदलावकारी रणनीति के बारे में सोचना होगा। यहीं पर 2डी सामग्री बहुत दिलचस्प हो जाती है।’’

उन्होंने कहा कि 2डी सामग्री, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीकों की अगली लहर में प्रवेश करने का एक ऐसा अवसर है जो पीढ़ियों में मिलता है, पुराने रास्ते पर चलकर नहीं, बल्कि नियमों को लगभग नए सिरे से लिखकर।

घोष ने कहा, ‘‘…मेरा मानना ​​है कि हमारे पास समय है और हमारे पास क्षमताएं भी हैं कि हम अपने सेमीकंडक्टर भविष्य के लिए आज से ही कदम उठाना शुरू कर दें।’’

इस बीच, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से 2डी सामग्रियों का उपयोग करके अनुसंधान और उत्पाद विकास के लिए रुचि पत्र आमंत्रित किए है।

भाषा रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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