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Saturday, 21 March, 2026
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सहकारी समितियों में प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए नया अधिनियम लाएगी राजस्थान सरकार

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जयपुर, 10 अक्टूबर (भाषा) राजस्थान सरकार सहकारी समितियों में प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनियमितताओं पर नियंत्रण एवं व्यवसाय वृद्धि के लिए नया सहकारी अधिनियम लाएगी।

आधिकारिक बयान के अनुसार राज्य सरकार समितियों तथा आमजन के हित में सहकारी कानून को अधिक प्रासंगिक बनाते हुए नवीन सहकारी अधिनियम लाने जा रही है। प्रस्तावित नवीन सहकारी अधिनियम में ऐसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जिनसे आमजन का सहकारी समितियों पर भरोसा और अधिक मजबूत होगा।

इसके अनुसार राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित नवीन सहकारी अधिनियम वर्तमान में लागू राजस्थान सहकारिता अधिनियम 2001 का स्थान लेगा। इसे वर्तमान परिप्रेक्ष्य के अनुरूप अधिक प्रासंगिक बनाया गया है।

राज्य सरकार ने इस संबंध में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था जिसने महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल आदि सहकारी आन्दोलन के अग्रणी राज्यों के सहकारी कानूनों का व्यावहारिक अध्ययन कर तथा वरिष्ठ अधिकारियों व विशेषज्ञों से चर्चा कर नए ‘को-ऑपरेटिव कोड’ का मसौदा तैयार किया था।

इस मसौदे में प्रक्रियाओं के सरलीकरण, अनियमितताओं पर नियंत्रण और त्वरित निस्तारण के साथ ही समितियों की व्यावसायिकता, आपसी सहयोग को सुगम बनाने, समितियों के प्रबंधन में एकाधिपत्य हटाने, लोकतांत्रिक एवं सदस्योन्मुखी प्रबंधन आदि पर विशेष रूप से ‘फोकस’ किया गया है।

राज्य में दो से 15 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे ‘सहकार सदस्यता अभियान’ के अंतर्गत जनसाधारण को प्रस्तावित नवीन अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी प्रदान कर उन्हें इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। अब तक तीन लाख 75 हजार से अधिक लोगों को प्रस्तावित अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी प्रदान की जा चुकी है।

इसके अनुसार नए अधिनियम में सहकारी समितियों को स्वयं के तथा सदस्यों के उत्पाद अपने कार्यक्षेत्र से बाहर भी विक्रय किए जाने की छूट दिये जाने तथा सोसायटियों में बाजार से प्रतिस्पर्धा एवं व्यवसाय में वृद्धि के लिए आपसी सहमत शर्तों पर साझेदारी करने के प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। भाषा पृथ्वी जितेंद्र रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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