नयी दिल्ली, 31 जनवरी (भाषा) उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना से लगभग 14 क्षेत्रों के घरेलू विनिर्माताओं को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी में निवेश लाने और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा बनाने में मदद करने में मदद मिलेगी। मंगलवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा 2022-23 में यह अनुमान लगाया गया।
इस योजना से देश में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) पारिस्थतिकी तंत्र को फायदा होगा।
समीक्षा में बताया गया कि 31 दिसंबर, 2022 तक 14 योजनाओं के अंतर्गत 717 आवेदनों को मंजूरी दी गई और लगभग 100 एमएसएमई थोक दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों, दूरसंचार, फ्रिज-वाशिंग मशीन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में पीएलआई लाभकर्ताओं में हैं।
योजना लागू करने वाले विभिन्न मंत्रालयों की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 47,500 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश किया गया है, जबकि पात्र उत्पादों का 3.85 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन/बिक्री की गई और लगभग तीन लाख रोजगार का सृजन हुआ।
सरकार ने विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। इसके पीछे विनिर्माण क्षेत्र में ‘चैंपियन’ बनाना और रोजगार के अवसरों का सृजन करना है।
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