नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) सरकार ने प्रस्तावित कोयला एक्सचेंज के कामकाज को विनियमित करने के लिए एक संगठन बनाने को लेकर नियमों का मसौदा जारी किया है। यह कदम एक जिंस के रूप में कोयले के कारोबार को सुगम बनाएगा।
प्रस्तावित कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) कोयला मंत्रालय का एक अधीनस्थ कार्यालय होगा। इसकी जिम्मेदारियों में पर्यावरण अनुकूल उपाय सुनिश्चित करने के साथ कोयला खदानों को बंद करने की गतिविधियां, कोयला आंकड़े एकत्र करना और उनका प्रसार करना, कोयला खदानों का निरीक्षण करना, कोयले के स्तर पर निर्देश जारी करना और ग्रेड यानी स्तर संबंधी विवादों के लिए अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करना शामिल है।
कोयला एक्सचेंज नियम, 2025 के मसौदे में कहा गया, ‘‘कोयला मंत्रालय देश में स्थापित होने वाले कोयला एक्सचेंज को पंजीकृत और विनियमित करने के लिए कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) की नियुक्ति का प्रस्ताव करता है।’’ इस नियम पर मंत्रालय ने अक्टूबर के मध्य तक विभिन्न पक्षों से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
कोयला एक्सचेंज का संचालन मोटे तौर पर कोयला नियंत्रक संगठन के बनाए नियमों के अनुसार होगा।
मसौदे में कहा गया है कि कोयला क्षेत्र में हाल के नीतिगत सुधारों के परिणामस्वरूप देश में कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और इस ईंधन की उपलब्धता में वृद्धि हुई है।
कोयला उत्पादन नई ऊंचाइयों पर पहुंचने के लिए तैयार है। देश ने पिछले वित्त वर्ष में एक अरब टन उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया है और 2030 तक इसके 1.5 अरब टन से अधिक हो जाने की संभावना है।
भाषा रमण अजय
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