नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) एक दुर्लभ घटना में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के एक न्यायिक सदस्य ने आरोप लगाया है कि ”उच्च न्यायपालिका के सबसे सम्मानित सदस्यों में एक ने उनसे संपर्क किया” और एक पक्ष के अनुकूल आदेश देने को कहा।
न्यायिक सदस्य ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।
अपीलीय न्यायाधिकरण की चेन्नई स्थित पीठ ने 13 अगस्त को पारित दो पैराग्राफ के आदेश में इस घटना को दर्ज भी किया है।
एनसीएलएटी के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।
एनसीएलएटी पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘हमें यह देखकर दुख हो रहा है कि हममें से एक सदस्य (न्यायिक) से इस देश की उच्च न्यायपालिका के सबसे सम्मानित सदस्यों में से एक ने विशेष पक्ष के अनुकूल आदेश देने के लिए संपर्क किया है। इसलिए, मैं मामले की सुनवाई से खुद को अलग करता हूं।’’
इस मामले की आगे सुनवाई के लिए अनुरोध भी किया गया है। दो सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति शर्मा और तकनीकी सदस्य जतिंद्रनाथ स्वैन शामिल थे।
यह पीठ हैदराबाद स्थित केएलएसआर इन्फ्राटेक के निलंबित निदेशक ए एस रेड्डी की एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। कंपनी दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) का सामना कर रही है।
भाषा पाण्डेय अजय
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