नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) सरकार की ओर से नयी फसल की खरीद से पहले सरसों, सोयाबीन, मूंगफली के पुराने स्टॉक की बिकवाली किये जाने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन तथा सोयाबीन तिलहन के दाम में गिरावट रही। मूंगफली के नरम रहने से बिनौला तेल के दाम में भी गिरावट रही। दूसरी ओर, सप्ताह के दौरान मलेशिया एक्सचेंज के मजबूत रहने के कारण सीपीओ एवं पामोलीन में सुधार रहा। सोयाबीन तेल के दाम में भी मामूली सुधार आया।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि पिछले सप्ताह में सरसों के नयी फसल की आवक बढ़ना शुरू हो गई है। मौसम खुला रहा तो अगले 10-15 दिन में आवक जोरों पर होगी और कीमतों पर दबाव बनेगा। लेकिन महंगे दाम वाले सरसों तेल की खपत तभी बढ़ पायेगी जब इसका दाम सोयाबीन तेल से 5-7 रुपये किलो नीचे होगा। इस बीच, नयी फसल की खरीद करने से पहले सरकार ने सरसों के पुराने स्टॉक की बिक्री की। मौजूदा अच्छे दाम पर सहकारी संस्था नाफेड को नयी फसल रखने की जगह बनाने के लिए अभी सरसों के पुराने स्टॉक को बेच देना चाहिये। किसानों को भी सरसों के अच्छे दाम मिले हैं। नयी फसल की आवक और सरकारी बिकवाली बढ़ने के बीच बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन में गिरावट दर्ज हुई।
उन्होंने कहा कि सोयाबीन के तेल रहित खल (डीओसी) की स्थानीय मांग कमजोर रहने और सरकारी बिकवाली के असर से सोयाबीन तिलहन के दाम में तो गिरावट आई। वहीं सोयाबीन तेल का आयात कम रहने के बीच मांग बने रहने से बीते सप्ताह सोयाबीन तेल कीमतों में मामूली सुधार है। सोयाबीन का अगला रुख डीओसी की स्थानीय मांग और सरकार की बिकवाली पर निर्भर करेगा।
सूत्रों ने कहा कि सरकारी बिकवाली के असर से बीते सप्ताह मूंगफली तेल-तिलहन में गिरावट देखी गई। वैसे मूंगफली में मंदी बने रहना मुश्किल है क्योंकि मजबूत आय वर्ग के उपभोक्ताओं में अच्छी गुणवत्ता वाली मूंगफली की साबुत खाने और बढ़िया खाद्य तेल की स्थिर मांग बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि बीते सप्ताह के दौरान मलेशिया एक्सचेंज में तेजी रहने की वजह से पाम-पामोलीन के दाम में सुधार है। सप्ताहांत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विभिन्न देशों पर शुल्क के फैसले को वहां के उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द किये जाने का इस खाद्य तेल पर क्या असर आया है इसका पता अगले सप्ताह के कारोबार में स्पष्ट होगा।
सूत्रों ने कहा कि मूंगफली की धारणा खराब रहने की वजह से बीते सप्ताह बिनौला तेल के दाम में भी गिरावट देखी गई। वैसे देखा जाये तो मंडियों में कपास नरमा की आवक घट गई है। कुछ समय पहले यह आवक लगभग दो लाख गांठ की हो रही थी जो अब घटकर आधी रह गई है। भारतीय कपास निगम (सीसीआई) ने किसानों से कपास की कुछ हिस्से की तो खरीद की लेकिन बाकी फसल को किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर ही बेचना पड़ रहा है।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 235 रुपये की गिरावट के साथ 6,675-6,700 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 400 रुपये की गिरावट के साथ 13,800 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 65-65 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 2,325-2,425 रुपये और 2,325-2,470 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 75-75 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 5,275-5,325 रुपये और 4,875-4,925 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
दूसरी ओर, दिल्ली में सोयाबीन तेल 50 रुपये के सुधार के साथ 14,400 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 50 रुपये के सुधार के साथ 14,000 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 50 रुपये के सुधार के साथ 11,250 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
बीते सप्ताह, सरकारी बिकवाली के दबाव में मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में गिरावट रही। मूंगफली तिलहन 75 रुपये की गिरावट के साथ 6,950-7,425 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 500 रुपये की गिरावट के साथ 17,000 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 100 रुपये की गिरावट के साथ 2,675-2,975 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।
बीते सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 75 रुपये के सुधार के साथ 11,800 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 75 रुपये के सुधार के साथ 13,700 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 75 रुपये के सुधार के साथ 12,600 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में बिनौला तेल का दाम भी 100 रुपये की गिरावट के साथ 12,950 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
भाषा राजेश
अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
