चेन्नई, एक फरवरी (भाषा) लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय उद्यमी संघ (एआईई) ने केंद्रीय बजट में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों के लिए विशिष्ट घोषणाओं का अभाव बताते हुए इसे अपेक्षाओं से विपरीत बताया।
एआईई के चेयरमैन (राष्ट्रीय) के. ई. रघुनाथन ने कहा, ‘यह एक निराशाजनक बजट है जो भविष्य के प्रति चिंता बढ़ाता है। यह ऐसा बजट है जो राहत की बात नहीं करता।’’
उन्होंने कहा, ‘जीएसटी को मूल्य वर्धित कर मॉडल के अनुरूप पुनर्गठित किया जाना चाहिए था। जिस प्रकार कॉरपोरेट को उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन (पीएलआई) दिए जाते हैं, उसी प्रकार लघु एवं सूक्ष्म उद्यमों को भी ‘मूल्य वर्धित प्रोत्साहन’ दिया जाना चाहिए था।’
उन्होंने कहा, ‘कई क्षेत्रों में अलग-अलग घोषणाएं, बजट आवंटन और प्रोत्साहन होने के बावजूद यह निराशाजनक है कि इस बजट में वे खास घोषणाएं नहीं हैं जिनकी एमएसएमई उद्योगों को बहुत उम्मीद थी।’
भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट की संस्थापक एवं प्रबंध ट्रस्टी लक्ष्मी वेंकटारमन वेंकटेशन ने कहा कि सात प्रतिशत वृद्धि दर, दो प्रतिशत मुद्रास्फीति और बुनियादी ढांचे में प्रगति को देखते हुए बजट समावेशी बनाने का प्रयास सराहनीय है।
भाषा योगेश अजय
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