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Saturday, 7 February, 2026
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खाद्य तेल-तिलहन में कारोबार का मिला-जुला रुख

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नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को कारोबार का रुख मिला-जुला दिखाई दिया। सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल-तिलहन तथा आवक कम रहने के बीच डीआयल्ड केक (डीओसी) की मांग होने के कारण सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे। जबकि दूसरी ओर बाजार में सस्ते आयातित तेलों की भरमार होने के साथ-साथ देशी तेल-तिलहनों के बाजार में खपने की चिंताओं के बीच सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, बिनौला, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतें गिरावट दर्शाती बंद हुई।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज 0.6 प्रतिशत की गिरावट रही जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में सामान्य कारोबार था और वहां कोई घट-बढ़ नहीं है।

कारोबारी सूत्रों के मुताबिक, सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के भाव अपरिवर्तित रहे। बाजार में आवक कम होने तथा डीओसी की मांग होने के कारण सोयाबीन तिलहन के भाव अपरिवर्तित रहे।

सूत्रों ने कहा कि लगभग आठ महीने पहले सूरजमुखी तेल का भाव प्रति टन सोयाबीन के भाव से 200 डॉलर अधिक था। अब सूरजमुखी तेल का भाव सोयाबीन से 60-70 डॉलर कम है। कुछ खुदरा तेल कारोबारी शुल्कमुक्त आयात की छूट का फायदा भी ले रहे हैं और खुदरा में ऊंचे भाव पर बिक्री भी कर रहे हैं। बंदरगाहों पर पहले सूरजमुखी तेल का भाव 200 रुपये लीटर पड़ता था और अब दाम टूटकर 96-97 रुपये लीटर रह गया है। लेकिन इसकी पड़ताल करने में असलियत सामने आयेगी क्योंकि खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को अभी भी यह तेल 160-170 रुपये लीटर मिल रहा है।

सूत्रों ने कहा कि मलेशिया में उत्पादन घटने पर चिंता जताई जा रही है लेकिन देश के तेल-तिलहन उद्योग की समस्या पर किसी का ध्यान नहीं जाता कि सस्ते आयातित तेलों के रहते बहुत जल्द मंडियों में आने वाली सरसों की आवक कैसे खपेगी। बाहरी देशों की दिक्कतों को समझना ठीक है पर अपने देशी तेल-तिलहन किसान, उद्योग की हालत और उसके फायदे के लिए जरूरी उपायों के बारे में भी उन्हें सोचना होगा।

सूत्रों ने कहा कि विदेशों से आपूर्ति कम होने की आशंका अगर सही भी है तो हमारे देशी तेल-तिलहन के लिए इस मायने में फायदेमंद है कि हमारे अपने स्टॉक पूरी तरह बाजार में खप जायेंगे और तिलहन किसान आगे और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगे। देशी तेल मिलें पूरी क्षमता से काम करेंगी, लोगों को रोजगार मिलेगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी जो अंतत: देश को इस मामले में आत्मनिर्भरता की चौखट तक ले जायेगा। वक्त-बेवक्त कभी जरूरी हुआ तो आयात का सहारा लिया जा सकता है। लेकिन जब वैश्विक तेल बाजार में खाद्य तेलों के दाम जमीन पर लोट रहे हों तो भी खुदरा कारोबार से उपभोक्ताओं को इस गिरावट का समुचित लाभ न मिले, यह अस्वीकार्य है।

बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 5,955-6,005 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,450-6,510 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,450 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,420-2,685 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 12,350 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,985-2,015 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,945-2,070 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,450 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,650 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,650 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 10,800 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,280 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,380 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,445-5,575 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,185-5,205 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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