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Wednesday, 14 January, 2026
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मांग कमजोर होने से खाद्य तेलों में मिला-जुला रुख

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नयी दिल्ली, 31 अक्टूबर (भाषा) विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को सरसों तेल-तिलहन और मूंगफली तेल कीमतों में सुधार दिखा जबकि मांग कमजोर होने और मंडियों में सोयाबीन की आवक बढ़ने से सोयाबीन तिलहन और सोयाबीन डीगम तेल कीमतों में गिरावट आई। सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली रिफाइंड तेल, सीपीओ, पामोलीन और बिनौला सहित अन्य सभी खाद्य तेल-तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

कारोबारी सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 1.4 प्रतिशत की तेजी थी जबकि शिकॉगो एक्सचेंज 1.5 प्रतिशत मजबूत है।

सूत्रों ने बताया कि शादी विवाह के मौसम और जाड़े की मांग होने की वजह से सरसों तेल-तिलहन और मूंगफली तिलहन कीमतों में सुधार आया। किसानों द्वारा नीचे भाव में अपनी उपज नहीं बेचने से भी इन तेल- तिलहनों के भाव में सुधार देखा गया। दिवाली की छुट्टियों के बाद मंडियों में मूंगफली की आवक बढ़ने के बावजूद मांग निकलने के कारण मूंगफली रिफाइंड तेल के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

सूत्रों ने कहा कि मूंगफली की नयी फसलों के दाम टूटने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस पर नजर रखनी होगी कि किसानों को वाजिब दाम मिलें और उन्हें कम कीमत की प्राप्ति न हो।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द सूरजमुखी और सोयाबीन तेल पर 5.50 प्रतिशत या इससे अधिक आयात शुल्क लगा देना चाहिये। इससे देश में खाद्य तेलों की आपूर्ति श्रृंखला में सुधार होगा तथा आपूर्ति बढ़ने से तेलों के दाम कम होंगे। साथ ही इससे सरकार को राजस्व मिलेगा, खाद्य तेल उद्योग और किसानों को भी फायदा होगा।

सूत्रों ने कहा कि मंडियों में सोयाबीन की आवक बढ़ने से सोयाबीन दाना और लूज (तिलहन फसलें) के साथ-साथ सोयाबीन डीगम तेल के भाव में गिरावट आई।

सर्दियों में तेल के जमने की प्रवृति की वजह से सीपीओ और पामोलीन की मांग प्रभावित होती है। लेकिन जाड़े में हल्के तेलों की मांग बढ़ती है। अगर सरकार ने सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे हल्के तेल आयात के लिए कोटा प्रणाली लागू न की होती तो तेल आपूर्ति की स्थिति संतोषजनक होती और दाम भी न बढ़े होते। सरकार को जल्द से जल्द कोटा व्यवस्था को खत्म करने की पहल करनी होगी ताकि देश में आपूर्ति बढ़े। या फिर सरकार इन खाद्य तेलों पर पहले की तरह आयात शुल्क लगा दे जिससे देश को राजस्व की भी प्राप्ति होगी। इन दोनों ही कदमों से आपूर्ति श्रृंखला में सुधार होगा और प्रतिस्पर्धा होने से तेल कीमतें नरम होंगी।

सूत्रों ने कहा कि आने वाले दिनों में वैश्विक स्तर पर सूरजमुखी तेल की आपूर्ति घटने की संभावना बन रही है।

सोमवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 7,160-7,185 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,870-6,935 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,000 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,560-2,820 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,800 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,260-2,390 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,330-2,445 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,800-20,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 14,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,650 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,950 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,200 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,600 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,650 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,310-5,360 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज 5,110-5,160 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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