( के के शंकर)
नयी दिल्ली, 22 दिसंबर (भाषा) तेल की आसमान छूती कीमतों ने जब दुनियाभर के देशों की अर्थव्यवस्थाओं को तगड़ा झटका दिया तब नवीकरणीय ऊर्जा का खयाल आया और भारत में सौर, जल और वायु के उपयोग से नवीकरणीय ऊर्जा विकसित करने के लिए 25 अरब डॉलर या दो लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनी।
दरसअल, 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने की वजह से तेल और गैस के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए और भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों को विकल्पों पर नजर डालनी पड़ी।
नवीकरणीय ऊर्जा विकल्पों को अपनाना शून्य-कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को पाने के लिहाज से भी अहम है इसलिए सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर 2022 में विशेष जोर दिया। इसके अलावा हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, सौर उपकरणों के विनिर्माण और ऊर्जा के भंडार पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है ताकि 2030 तक 500 गीगावॉट की नवीकरणीय ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को वह पा सके।
हालांकि, इस लक्ष्य को पाने के लिए भारत को लगातार आठ साल तक हर वर्ष 25 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को जोड़ना होगा। मौजूदा समय में देश के पास 173 गीगावॉट की गैर जीवाश्म ईंधन आधारित स्वच्छ ऊर्जा क्षमता है जिसमें से करीब 62 गीगावॉट सौर ऊर्जा, 42 गीगावॉट पवन ऊर्जा, 10 गीगावॉट बायोमास ऊर्जा, करीब पांच गीगावॉट के छोटे पनबिजली संयंत्र, 47 गीगावॉट के बड़े पनबिजली संयंत्र और सात गीगावॉट की परमाणु ऊर्जा क्षमता है।
केंद्रीय बिजली, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने कहा कि 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करीब 25 अरब डॉलर होगा। उन्होंने कहा, ‘‘2030 तक हमें 500 गीगावॉट के लक्ष्य को हासिल करना है। मौजूदा क्षमता 173 गीगावॉट और निर्माणाधीन क्षमता करीब 80 गीगावॉट है जिससे क्षमता बढ़कर 250 गीगावॉट हो जाएगी। इसलिए 2030 तक हमें और 200 गीगावॉट क्षमता जोड़नी है।’’
सिंह ने बताया कि हम सौर विनिर्माण कर रहे हैं जिससे निवेश आएगा। मौजूदा समय में 8,780 करोड़ रुपये की क्षमता निर्माणाधीन है। इसके अलावा 19,500 करोड़ रुपये की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भी ला रहे हैं जिससे करीब 40 गीगावॉट क्षमता विकसित होगी।
केंद्र सरकार राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के जरिये हरित हाइड्रोजन पर भी ध्यान दे रही है। इलेक्ट्रोलाइजर के विनिर्माण के लिए अगले वर्ष बोलियां आमंत्रित की जा सकती हैं, इससे भी स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश आएगा।
सौर ऊर्जा विकास संगठन (एसपीडीए) का सुझाव है कि अमोनिया और हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परिभाषा में शामिल किया जाना चाहिए जिससे इन क्षेत्रों में निवेश विदेशी उद्यम पूंजी निवेशक के जरिये आ सकेगा।
विक्रम सोलर के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ज्ञानेश चौधरी ने कहा, ‘‘भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश सालाना आधार पर 125 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 2021-22 में रिकॉर्ड 14.5 अरब डॉलर हो गया।’’ हालांकि, उन्होंने कहा कि सौर आयात (80 से 90 फीसदी अब भी आयात होता है) और महंगी कच्ची सामग्री की चुनौतियां सामने खड़ी हैं।
सुजलॉन समूह के कार्यकारी उपाध्यक्ष गिरीश तांती ने कहा, ‘‘भारत के लिए 2022 नवीकरणीय और ऊर्जा परिवर्तन के लिहाज से एक शानदार वर्ष रहा है। स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 165 गीगावॉट के पार हो गई जबकि भारतीय सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड की समेकित बोलियां 42 गीगावॉट पर पहुंच गईं।’’
भाषा अजय मानसी
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