नई दिल्ली: यूनियन बजट 2026 के करीब आने के साथ, उद्योग जगत के नेता सरकार की वित्तीय नीति और उससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की संभावनाओं को लेकर आशावादी हैं. आईएमसी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महानिदेशक अजीत मंगरुलकर का मानना है कि यह बजट विकास पर केंद्रित होगा, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक और डिजिटल पहलों पर जोर रहेगा.
मंगरुलकर ने कहा, “बजट से उम्मीदें बहुत सकारात्मक हैं. यह एक विकासोन्मुख बजट होने की संभावना है. हम 7 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के रास्ते पर हैं और राजकोषीय घाटा नियंत्रण में है. हालांकि, मेरा मानना है कि सरकार और अधिक फंड आवंटित कर सकती है. कुल मिलाकर, बजट भारत के हित में जो सबसे अच्छा है, उसी पर केंद्रित होगा.”
उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के हितों को प्राथमिकता देने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने वैकल्पिक बाजार विकसित करने और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स यानी एफटीए को आगे बढ़ाने के सरकार के प्रयासों का जिक्र किया.
उन्होंने कहा, “वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद हमें भारत के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए. हम सक्रिय रूप से वैकल्पिक बाजार विकसित कर रहे हैं. जिस तेजी से सरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को आगे बढ़ा रही है और जिस तरह से भारत के साथ एफटीए साइन करने में अंतरराष्ट्रीय रुचि बढ़ रही है, वह बेहद उत्साहजनक संकेत है. इससे हमें अमेरिका के विकल्प के तौर पर एक बाजार बनाने में मदद मिलती है. वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद हमें चिंतित होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारी सरकार विकास की रफ्तार बनाए रखने में सक्षम है.”
मंगरुलकर को इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, एआई और डिजिटल पहलों में अधिक निवेश की उम्मीद है, साथ ही रक्षा खर्च बढ़ने की भी संभावना है. हालांकि, उन्हें व्यक्तिगत कर व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, सिवाय नए टैक्स सिस्टम में स्लैब में संभावित बदलाव और कैपिटल गेन को सरल बनाने के.
उन्होंने कहा, “हम इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्यादा निवेश की उम्मीद कर सकते हैं, जिसमें तकनीक, एआई और डिजिटल पहलों पर खास जोर होगा. मैं रक्षा खर्च में भी बढ़ोतरी की उम्मीद करता हूं, क्योंकि यह हमेशा शीर्ष प्राथमिकता रही है. कुल मिलाकर, यह एक विकासोन्मुख बजट होगा. जहां तक व्यक्तिगत कर का सवाल है, मुझे बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, क्योंकि पिछले साल ही काफी कुछ किया जा चुका है. नए सिस्टम में कुछ टैक्स स्लैब में बदलाव और कैपिटल गेन को थोड़ा सरल किया जा सकता है. इसके अलावा, व्यक्तिगत कर में ज्यादा कुछ होने की उम्मीद नहीं है.”
इंटरनेशनल बिजनेस कमेटी के सह-अध्यक्ष सौरभ शाह ने भी इसी तरह की राय दोहराई. उन्होंने कहा कि यह बजट भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए एक रोडमैप की तरह काम करेगा. शाह ने एफटीए का जमीनी स्तर पर कारोबार को फायदा पहुंचाने के लिए इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया और मुद्रा स्थिरता तथा ब्याज दरों से जुड़े सुधारों की भी उम्मीद जताई.
शाह ने कहा, “आज का बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है. यह भारत की आर्थिक वृद्धि का रोडमैप होगा. मेरा मानना है कि इस बजट में मध्यवर्ग के लिए व्यक्तिगत आयकर स्लैब को तर्कसंगत बनाया जा सकता है, साथ ही स्टार्टअप्स, एमएसएमई और तकनीकी कंपनियों के लिए प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं. सरकार ने कई एफटीए साइन किए हैं और हम सूक्ष्म स्तर पर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बना रहे हैं. हमें इन एफटीए का इस्तेमाल जमीनी स्तर पर उद्योगों को फायदा पहुंचाने के लिए करना चाहिए. सरकार मुद्रा स्थिरता और ब्याज दरों से जुड़े सुधार भी ला सकती है. मुझे उम्मीद है कि राज्यों और केंद्र सरकार के बीच अनुपालन और नियमों में तालमेल होगा, ताकि जमीनी स्तर पर कारोबार करना आसान हो, विदेशी कंपनियां भारत आएं और भारतीय कंपनियां विस्तार कर सकें.”
संसद में यूनियन बजट 2026 पेश किए जाने से पहले, रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन पहुंचने पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ‘दही-चीनी’ खिलाई.
‘दही-चीनी’ की यह रस्म राष्ट्रपति द्वारा निभाई जाती है, क्योंकि इसे दिन की शुभ शुरुआत माना जाता है. यह पारंपरिक शुभकामना का इशारा राष्ट्रपति भवन में वित्त मंत्री और राष्ट्रपति मुर्मू की मुलाकात के दौरान किया गया.
इस मौके पर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी भी मौजूद थे. वित्त मंत्री को राष्ट्रपति के साथ बजट प्रस्तावों की रूपरेखा पर चर्चा करते हुए देखा गया.
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