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Saturday, 11 April, 2026
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भारत के भू-स्थानिक बाजार के 2030 तक करीब 1.06 लाख करोड़ तक पहुंचने की क्षमता: कांत

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नयी दिल्ली, दो दिसंबर (भाषा) जी-20 में भारत के पूर्व शेरपा अमिताभ कांत ने सोमवार को कहा कि भारत का भू-स्थानिक बाजार 2030 तक दोगुना होकर करीब 1.06 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।

कांत ने कहा कि 2030 तक ‘‘ 50,000 करोड़ के भू-स्थानिक बाजार के दोगुना होकर 1.06 लाख करोड़ तक पहुंचने और 2033 तक भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के 44 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान…बड़ी महत्वाकांक्षा के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा। ’’

भू-स्थानिक बाजार से तात्पर्य ऐसे स्थान से है जहां पृथ्वी की सतह से जुड़े डेटा, प्रौद्योगिकी, सेवाएं और उत्पाद उपलब्ध किए जाते हैं। इसमें वे सभी कंपनियां, प्रौद्योगिकी व सेवाएं शामिल होती हैं जो मैपिंग, जीपीएस उपग्रह चित्र, लोकेशन डेटा, विश्लेषण और स्थान आधारित समाधान प्रदान करती हैं।

नीति आयोग के पूर्व सीईओ कांत ने जियोस्पेशियल वर्ल्ड द्वारा यहां भारत मंडपम में आयोजित ‘जियोस्मार्ट वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपो 2025’ में कहा कि 30,000 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की भारत की आकांक्षा के लिए नवाचार, डेटा सुलभता एवं सार्वजनिक-निजी सहयोग में तेजी से वृद्धि की आवश्यकता है।

कांत ने कहा, ‘‘ हमने 2021 में भू-स्थानिक क्षेत्र को खोला। आज इसमें अपार संभावनाएं हैं, लेकिन नवाचार को भारत की महत्वाकांक्षाओं की गति से आगे बढ़ना होगा। भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियां आधारभूत हैं, हम उनके बिना एक विकसित भारत का निर्माण नहीं कर सकते।’’

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन, सिंगापुर और नॉर्डिक देशों जैसे देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत के लिए खुला, अंतर-संचालनीय, मशीन से पढ़ा जाने वाला आंकड़ा आवश्यक है।

‘नॉर्डिक’ उत्तरी यूरोप के पांच देशों डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन का समूह है।

पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने स्वामित्व कार्यक्रम के तहत हुई उल्लेखनीय प्रगति और ग्राम स्तर पर सरल भू-स्थानिक उपकरणों के प्रभाव को उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि कैसे 3.5 लाख से अधिक गांव के सर्वेक्षण, तीन करोड़ संपत्ति कार्ड जारी होने और कानूनी रूप से सत्यापित भू-स्थानिक मानचित्रों से लाखों लोगों को लाभ हुआ है।

भारद्वाज ने कहा, ‘‘ यह केवल मानचित्रण नहीं है बल्कि यह ग्रामीण भारत की आर्थिक एवं सामाजिक गाथा को पुन:परिभाषित कर रहा है।’’

भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने उच्च-परिशुद्धता भू-स्थानिक परतों के माध्यम से भूमि संबंधी काम काज को आधुनिक बनाने के भारत के प्रयासों के बारे में बताया।

उन्होंने भारत के ‘लैंड स्टैक’ यानी जमीन से जुड़ी हर जानकारी एक ही मंच पर की अवधारणा का उल्लेख किया जो एक राष्ट्रव्यापी आधार मानचित्र और सत्यापित भूखंड सीमाओं को एकीकृत करता है।

जोशी ने कहा, ‘‘ एक सटीक भूमि मानचित्र पारदर्शी कामकाज, कुशल नियोजन और लोगों के विश्वास की रीढ़ है।’’

भाषा

निहारिका रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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