नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर उत्पन्न संकट के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.1 से 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। एक रिपोर्ट में बुधवार को यह अनुमान लगाया गया है।
प्रमुख सलाहकार कंपनी डेलॉयट इंडिया की ‘भारत का आर्थिक परिदृश्य-जुलाई, 2022’ रिपोर्ट में कहा गया है कि जब 2021 का साल समाप्त हो रहा था, तो उस समय कुछ उम्मीदें थीं। लेकिन कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन से इन उम्मीदों को झटका लगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन घटनाक्रमों की वजह से पहले से मौजूद चुनौतियां मसलन मुद्रास्फीति, आपूर्ति की कमी और भूराजनीतिक वास्तविकताओं में बदलाव…और बढ़ गईं।
इसमें कहा गया है कि जिंस कीमतों में बढ़ोतरी, मुद्रास्फीति के ऊंचे स्तर पर पहुंचने और आपूर्ति की कमी के बावजूद भारत अब भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का दर्जा कायम रख सकता है।
रिपोर्ट कहती है, ‘‘2022-23 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.1 से 7.6 प्रतिशत रहेगी। 2023-27 में यह 6 से 6.7 प्रतिशत के बीच रहेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भारत अगले कुछ साल तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा।’’
भाषा अजय अजय रमण
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