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Friday, 10 April, 2026
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ब्रिटेन से विकास सहायता प्राप्त करने वाला प्रमुख देश है भारत: निगरानी संस्था

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लंदन, 14 मार्च (भाषा) ब्रिटेन सरकार की तरफ से अन्य देशों को दी जाने वाली सहायता राशि पर नजर रखने वाली स्वतंत्र संस्था ने पिछले कुछ साल में भारत को विकास सहायता देने के मामले में एक रुख नहीं अपनाने का आरोप लगाते हुए इसकी आलोचना की है। संस्था के अनुसार, 2016 से 2021 के बीच भारत को 2.3 अरब पाउंड की मदद दी गई है और वह द्विपक्षीय सहायता राशि प्राप्त करने वालों में प्रमुख देश रहा।

संस्था इंडिपेंट कमीशन ऑन एड इम्पैक्ट (आईसीएआई) ने अपनी भारत के मामले में अपनी समीक्षा में बताया कि कई लोगों के लिए यह आश्चर्य की बात होगी कि 2015 में रिश्ते बदलने के बावजूद भारत को की जाने वाली ब्रिटेन की मदद उच्च स्तर पर बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार पारंपरिक दानदाता-प्राप्तकर्ता के रिश्ते के बजाय अब बराबर साझेदारी को वरीयता देती है।

आईसीएआई के आकलन के अनुसार, भारत निजी क्षेत्र में ऋण और पूंजी निवेश के रूप में ब्रिटेन के विकास निवेश का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना हुआ है। इसका लक्ष्य विकास को आगे बढ़ाना है।

संस्था की समीक्षा के अनुसार, “भारत को ब्रिटेन की सहायता अब एक दशक पहले प्रदान की गई सहायता से बहुत भिन्न है। ब्रिटेन अब भारत को वित्तीय मदद का प्रस्ताव नहीं देता है, ना ही वह गरीब प्रांतों में गरीबी घटाने के लिए आर्थिक मदद करता है।”

समीक्षा के अनुसार, “बहरहाल, भारत अभी भी ब्रिटेन की द्विपक्षीय सहायता का एक बड़ा प्राप्तकर्ता है। वह इस मामले में 2021 में 11वें स्थान पर रहा है। बीआईआई (ब्रिटिश इनवेस्टमेंट इंटरनेशनल) निवेशों को ध्यान में रखें तो हमारा अनुमान है कि भारत को 2016 और 2021 के बीच ब्रिटेन की सहायता के रूप में लगभग 2.3 अरब पाउंड प्राप्त हुए। हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि इस आंकड़े में विदेशी, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) के 12.9 करोड़ पाउंड निवेश ने ब्रिटेन के करदाता को कुछ रिटर्न दिया है।”

समीक्षा की अगुआई करने वाले आईसीएआई के प्रमुख आयुक्त डॉ. तामसिन बार्टन ने कहा, “ब्रिटेन से मदद लेने के मामल में 2021 में भारत 11वें स्थान पर रहा। इस दौरान भारत को बांग्लादेश और केन्या जैसे देशों से भी ज्यादा मदद मिली। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि एक-एक पैसा सही जगह खर्च या निवेश किया गया है।’’

भाषा अनुराग रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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