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Monday, 13 April, 2026
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भारत को आईएमएफ से ‘‘प्रतिगामी कर’’ संबंधी सबसे अधिक सिफारिशें मिलीं: ऑक्सफैम

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नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) भारत को 2022 से 2024 के बीच अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से सबसे अधिक ‘‘प्रतिगामी कर’’ संबंधी सिफारिशें प्राप्त हुईं। अंतरराष्ट्रीय संगठन ऑक्सफैम के एक विश्लेषण में यह जानकारी दी गई।

यह विश्लेषण वॉशिंगटन (अमेरिका) में आईएमएफ और विश्व बैंक की वसंत बैठकों से पहले जारी किया गया। इसमें कहा गया कि वैश्विक संस्था ‘‘दोहरा मानदंड’’ अपना रही है जहां वह समृद्ध देशों को मुख्यतः प्रगतिशील (प्रोग्रेसिव) सलाह देती है, जबकि अन्य देशों को प्रतिगामी (रिग्रेसिव) उपाय सुझाती है जो ‘‘असमानता को बढ़ा सकते हैं।’’

रिपोर्ट के मुताबिक, निम्न एवं निम्न-मध्यम आय वाले देशों को दी गई आईएमएफ की 59 प्रतिशत कर सलाह प्रतिगामी रही जबकि उच्च आय वाले देशों को दी गई 52 प्रतिशत सिफारिशें प्रगतिशील थीं।

प्रतिगामी कर उस समान कर प्रणाली को कहा जाता है जिसमें कम आय वर्ग पर उच्च आय वालों की तुलना में अधिक बोझ पड़ता है। इसके विपरीत, आय के अनुपात में लगाया जाने वाला कर प्रगतिशील कहलाता है।

ऑक्सफैम ने 2022 से 2024 के बीच 125 देशों को दी गई आईएमएफ की 1,049 कर सिफारिशों का अध्ययन किया और पाया कि इनमें से केवल 30 सिफारिशें, यानी करीब तीन प्रतिशत, शुद्ध संपत्ति कर एवं संपत्ति से होने वाली आय (जैसे पूंजीगत लाभ) पर कराधान से संबंधित थीं।

रिपोर्ट में कहा गया कि अत्यधिक संपत्ति में तेज वृद्धि के बावजूद 2020 के बाद अरबपतियों की संपत्ति में 81 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

विश्लेषण में पाया गया कि अमेरिका और ब्राजील को आईएमएफ से सबसे अधिक प्रगतिशील कर सलाह मिली। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ब्रिटेन, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे को भी अधिक प्रगतिशील सिफारिशें मिलीं। इसके साथ ही चीन, कजाखस्तान, अंगोला और बोत्सवाना को ऐसी ही सलाह मिली।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ उच्च आय वाले देशों को सामान्यतः प्रगतिशील उपायों की ओर झुकी हुई आईएमएफ की सिफारिशें मिलती हैं जो इन देशों को दी गई कुल वर्गीकृत सलाह का 52 प्रतिशत हैं। लेकिन गरीब देशों को ऐसा व्यवहार नहीं मिलता।’’

दूसरी ओर भारत को सबसे अधिक प्रतिगामी सिफारिशें मिलीं। इसके बाद वैश्विक दक्षिण के कई अन्य देशों का स्थान रहा।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के लिए कर सलाह का यह प्रतिगामी पहलू दर्शाता है कि आईएमएफ द्वारा सुझाए गए अधिकतर उपाय इन देशों में असमानता को बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इससे कर का अधिक बोझ मध्यम एवं निम्न आय वर्ग पर पड़ता है जबकि सबसे अमीर तबका लगभग अछूता रहता है।’’

रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया के लिए आईएमएफ की कर सलाह ‘‘सबसे अधिक प्रतिगामी’’ रही। इसके बाद लातिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र तथा उप-सहारा अफ्रीका का स्थान रहा।

विश्लेषण में चिली, नाइजीरिया और हंगरी के उदाहरण दिए गए जहां आईएमएफ ने ऐसे उपाय सुझाए जो निम्न एवं मध्यम आय वर्ग पर अनुपातहीन बोझ डाल सकते हैं।

चिली में जहां आय असमानता का स्तर काफी अधिक है आईएमएफ ने निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के लिए कर दरें बढ़ाने की सलाह दी, जबकि उच्च आय वर्ग की दरों को यथावत रखने का सुझाव दिया।

नाइजीरिया में जहां लगभग एक-तिहाई आबादी गरीबी में जीवन यापन करती है (जो अफ्रीका में सबसे अधिक है), आईएमएफ ने मूल्य वर्धित कर (वैट) बढ़ाने का सुझाव दिया जबकि हंगरी में ऊर्जा कंपनियों पर अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) के खिलाफ सलाह दी।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ प्रगतिशील कर प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि जिनकी आय एवं संपत्ति अधिक है, वे कम आय वालों की तुलना में अनुपातिक रूप से अधिक कर दें। शुद्ध संपत्ति और पूंजीगत लाभ कर जैसे प्रगतिशील उपायों की सिफारिशें बहुत कम की गईं और जब की गईं, तो वे मुख्यतः उच्च आय वाले देशों तक सीमित रहीं।’’

रिपोर्ट में कुछ देशों के उदाहरण भी दिए गए, जो कर नीति संबंधी चिंताओं को दर्शाते हैं। न्यूजीलैंड में आईएमएफ ने कहा कि वहां कॉरपोरेट आयकर ‘‘ समान विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक’’ है और इसे कम करने की सलाह दी।

स्वीडन में उसने आवास बाजार में विकृतियों को दूर करने के लिए ‘‘स्थगित पूंजीगत लाभ पर कर घटाने’’ की सिफारिश की। फिलीपीन में आईएमएफ ने छूटों को तर्कसंगत बनाकर वैट आधार को व्यापक करने की बात कही जबकि ‘कोटे डी आइवर’ (आइवरी कोस्ट) में वैट छूट समाप्त कर वैधानिक दरें लागू करने का सुझाव दिया।

ऑक्सफैम ने कहा कि आईएमएफ सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता है कि कर नीति असमानता को दूर करने का एक महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन वह उच्च आय वाले देशों के लिए अपनी कर सलाह को असमानता से कहीं अधिक (34 प्रतिशत) जोड़ता है। वहीं निम्न एवं निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए यह आंकड़ा केवल आठ प्रतिशत है। इन देशों में से लगभग 90 प्रतिशत में मध्यम या उच्च स्तर की असमानता है।

ऑक्सफैम इंटरनेशनल के वॉशिंगटन कार्यालय की प्रमुख केट डोनाल्ड ने कहा कि आईएमएफ ‘‘दोहरा मानदंड’’ अपना रहा है, जहां वह समृद्ध देशों को प्रगतिशील सलाह देता है, जबकि अन्य देशों के लिए प्रतिगामी उपाय सुझाता रहता है।

डोनाल्ड ने कहा, ‘‘ आईएमएफ एक चिंताजनक दोहरे मानदंड के साथ काम कर रहा है, जो उसके मूल सिद्धांत ‘‘समान व्यवहार’’ पर सवाल खड़ा करता है। यह अमीर देशों को अधिकतर प्रगतिशील कर सलाह देता है जबकि दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए उसका मार्गदर्शन बड़े पैमाने पर प्रतिगामी बना हुआ है। कोष को सभी सदस्य देशों को समान रूप से प्रगतिशील कर सलाह देनी चाहिए या फिर यह स्वीकार करना चाहिए कि असमानता से निपटने की उसकी प्रतिबद्धता केवल औपचारिक है।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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