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Wednesday, 25 March, 2026
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भारत, ऑस्ट्रेलिया का दुर्लभ खनिज क्षेत्र में सहयोग मजबूत बनाने का निर्णय

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नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सोमवार को लिथियम और कोबाल्ट जैसे दुर्लभ खनिज से जुड़ी संयुक्त परियोजनाओं में सहयोग को प्रगाढ़ बनाने का संकल्प जताया। दोनों पक्षों ने क्षेत्र में संबंधों को मजबूत बनाने को लेकर बातचीत के दौरान यह संकल्प जताया।

भारत महत्वपूर्ण खनिज के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहा है। आस्ट्रेलिया लिथियम, कोबाल्ट और वैनेडियम जैसे खनिज का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विनिर्माण के लिये महत्वपूर्ण माना जाता है।

कोयला और खान मंत्री प्रह्लाद जोशी और ऑस्ट्रेलिया की संसाधन मंत्री मेडेलिन किंग ने दुर्लभ खनिज क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के तरीकों पर बातचीत की। यह बातचीत मार्च में दोनों देशों के प्रधानमंत्री के बीच ऑनलाइन शिखर सम्मेलन के दौरान किये गये निर्णय के अनुरूप है।

जोशी फिलहाल ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर हैं।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार के बयान के अनुसार बैठक में किंग ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया तीन साल की भारत-ऑस्ट्रेलिया ‘दुर्लभ खनिज निवेश भागीदारी के लिये 58 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (39.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर) देगा।

किंग ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और भारत महत्वपूर्ण खनिजों पर एक स्वभाविक भागीदार हैं। दोनों देश कार्बन उत्सर्जन को कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

बयान के अनुसार जोशी ने कहा, ‘‘हमने हाल ही में खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड और ऑस्ट्रेलिया के क्रिटिकल मिनरल्स फैसिलिटेशन ऑफिस (सीएमएफओ) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य भारत के लिये महत्वपूर्ण और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिज की भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करना है।’’

उन्होंने कहा कि समझौता ज्ञापन में ऑस्ट्रेलिया की लिथियम और कोबाल्ट खनिज संपत्ति के संयुक्त रूप से जांच-परख का कार्य शामिल है।

जोशी ने कहा, ‘‘सीएमएफओ और भारतीय संयुक्त उद्यम खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड दोनों संयुक्त रूप से 60 लाख डॉलर (अमेरिकी) की शुरुआती राशि के साथ जांच-परख का काम करेंगे। जांच-परख का काम पूरा होने और संभावित परियोजनाओं की पहचान के बाद हम निवेश अवसरों का पता लगाएंगे।’’

भाषा

रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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