नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) सरकार ने मंगलवार को कहा कि अग्रिम प्राधिकरण योजना के तहत रासायनिक आयात के लिए निर्यात दायित्व अवधि को छह महीने से बढ़ाकर 18 महीने करने से निर्यातकों को बहुत जरूरी राहत मिलेगी।
सरकार ने अमेरिकी शुल्क को लेकर चिंताओं के बीच यह कदम उठाया है।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने बयान में कहा, ”यह उपाय पूरे भारत में रसायन और पेट्रोरसायन का कारोबार करने वाले निर्यातकों को जरूरी समर्थन और लचीलापन देगा।”
इस कदम से व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने और भारतीय वस्तुओं की वैश्विक बाजार में बढ़त कायम होने की उम्मीद है।
बयान में आगे कहा गया, ”निर्यात दायित्व की समयसीमा अब छह महीने से बढ़ाकर 18 महीने कर दी गई है, जिससे उद्योग को पर्याप्त बफर मिलेगा।”
अग्रिम प्राधिकरण योजना के जरिये आयातक निर्यात उत्पादन के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) का पालन किए बिना शुल्क मुक्त कच्चा माल ला सकते हैं।
इनमें से कई प्राधिकरण रासायनिक क्षेत्र के लिए हैं, जो इस नीतिगत बदलाव के महत्व को दर्शाते हैं। सरकार लक्षित रणनीतियों के जरिये रसायन और पेट्रोरसायन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस क्षेत्र का निर्यात में योगदान 2024-25 में 46.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो देश के कुल निर्यात मूल्य का 10.6 प्रतिशत है।
इस पहल का मकसद इनपुट लागत से वित्तीय दबाव को कम करना, कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना और दुनिया भर में भारतीय रासायनिक उत्पादों की प्रतिस्पर्धी स्थिति को मजबूत करना है।
भाषा पाण्डेय अजय
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