(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच घरों में रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
सीतारमण ने राज्यसभा में अनुदान संबंधी पूरक मांगों के दूसरे बैच पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि देश में खरीफ फसल के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है और अगली रबी फसल के लिए पोषक तत्वों की खरीद को लेकर वैश्विक बोली प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।
भारत अपनी घरेलू एलपीजी आवश्यकताओं का लगभग 65 प्रतिशत आयात करता है और इसका 90 प्रतिशत हिस्सा युद्ध से प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है।
सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट ने एक नई चुनौती पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भरता पर जोर देने तथा भारत की बुनियादी मांगों को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों से देश को मदद मिली है।
उन्होंने कहा, ‘‘लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात में कुल 65 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। इसके परिणामस्वरूप, यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि हमें एलपीजी मिलेगी या नहीं। इस संकट के समय में हम निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं और इस बारे में पर्याप्त रिपोर्ट मौजूद हैं।’’
एलपीजी क्षेत्र के बारे में सीतारमण ने कहा कि देश उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है और ‘‘इस समय भी जिस तरह से हमने एलपीजी में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, उससे भी मदद मिल रही है।’’
उल्लेखनीय है कि सरकार ने आठ मार्च को तेल रिफाइनरियों और पेट्रोरसायन परिसरों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने का निर्देश दिया था।
सीतारमण ने कहा, ‘‘इसके परिणामस्वरूप, घरेलू स्तर पर भी, हम एलपीजी आपूर्ति के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ा रहे हैं, और घरेलू एलपीजी उत्पादन लगभग 25 प्रतिशत बढ़ रहा है और इस बढ़ी हुई क्षमता से प्राप्त पूरा उत्पादन घरेलू उपभोक्ताओं को जा रहा है।’’
उन्होंने कहा, “इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि परिवारों को परेशानी न हो, न केवल पोत परिवहन के जरिये निरंतर प्रवाह बना हुआ है, बल्कि हमने घरेलू स्तर पर भी एलपीजी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए अन्य हाइड्रोकार्बन पदार्थों से एलपीजी उत्पादन की ओर रुख किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, घरेलू आपूर्ति पर्याप्त रूप से व्यवस्थित होगी और आपूर्ति स्थिर बनी रहेगी।”
उर्वरकों के बारे में मंत्री ने कहा कि खरीफ सत्र के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है और रबी फसल (शीतकाली) के लिए आयात को लेकर वैश्विक बोली प्रक्रिया शुरू होगी।
भाषा रमण अजय
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