मुंबई, नौ फरवरी (भाषा) घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि नीतिगत दर रेपो में वृद्धि से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की कर्ज वसूली की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो दर में वृद्धि के एक दिन बाद इक्रा ने यह टिप्पणी की है।
इक्रा रेटिंग्स ने कहा कि इसका प्रमुख कारण यह है कि एक तो कर्जदारों ने मकान के रूप में गारंटी दे रखी है और दूसरा वे भुगतान करने को इच्छुक हैं।
आरबीआई ने महंगाई को काबू में लाने के लिये पिछले साल मई से लगातार छठी बार नीतिगत दर में वृद्धि की। इससे बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानाओं में ब्याज दर बढ़ने का सिलसिला बना हुआ है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि आमतौर पर आवास ऋण और मकान तथा अन्य संपत्ति पर लिये गये कर्ज को लेकर ब्याज दर का जोखिम जुड़ा है।
उसने कहा, ‘‘नीतिगत दर में लगातार वृद्धि को देखते हुए वित्तीय संस्थानों ने मकान गिरवी रखकर जो कर्ज दिया हुआ है, उसकी वसूली को लेकर कुशलता प्रभावित होने की संभावना है। साथ ही कर्जदार ऐसे कर्ज को लौटाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।’’
एजेंसी ने कहा कि क्षेत्र के लिये परिदृश्य मजबूत रहने के साथ वसूली कुशलता बेहतर बने रहने की उम्मीद है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर जो अनिश्चित माहौल है, उसका अभी आकलन करना मुश्किल है।
इक्रा के अनुसार, आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और आवास वित्त कंपनियों की वसूली कुशलता चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में 97 से 105 प्रतिशत रही।
भाषा रमण अजय
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