नयी दिल्ली, 29 अगस्त (भाषा) रुपये के मूल्य में गिरावट के कारण घरेलू तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को आयातित तेल के दाम में सुधार देखने को मिला। सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल के साथ साथ मामूली कामकाज वाले देशी बिनौला तेल के दाम भी मजबूत बंद हुए। दूसरी ओर, कमजोर मांग और ढीले कामकाज के बीच सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन तथा सोयाबीन तिलहन के दाम हानि दर्शाते बंद हुए।
मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में फिलहाल गिरावट है।
सरकार ने आज आयात शुल्क मूल्य में वृद्धि की है। इसके तहत सीपीओ का आयात शुल्क मूल्य पहले के 1,030 डॉलर से बढ़ाकर 1,060 डॉलर प्रति टन तथा सोयाबीन डीगम तेल का आयात शुल्क मूल्य पहले के 1,134 डॉलर से बढ़ाकर 1,146 डॉलर प्रति टन कर दिया गया है।
बाजार सूत्रों ने कहा कि रुपये के सर्वकालिक निम्न स्तर को छूने और आयात शुल्क मूल्य में वृद्धि होने के बीच सोयाबीन तेल तथा सीपीओ एवं पामोलीन तेल के दाम मजबूत हुए। विदेशी तेलों में तेजी के अनुरूप, कमजोर कामकाज वाले बिनौला तेल के दाम भी मजबूत हुए।
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, सितंबर में कैनोला (विदेशी सरसों तेल) का आयात होने की खबर से बाजार की कारोबारी धारणा के प्रभावित होने से सरसों तेल-तिलहन में गिरावट रही। वहीं सोयाबीन की सरकारी बिकवाली होने के कारण सोयाबीन तिलहन में भी गिरावट रही। कमजोर कामकाज और निर्यात की कमजोर मांग की वजह से मूंगफली तेल-तिलहन में भी गिरावट रही।
सूत्रों ने कहा कि देश के एक प्रमुख तेल संगठन की ओर से पिछले कई सालों से मांग की जा रही थी कि घरेलू प्रसंस्करण उद्योगों को चलायमान रखने के लिए सीपीओ और पामोलीन के बीच के कम शुल्क अंतर को बढ़ाया जाये ताकि सस्ता बैठने वाले पामोलीन का आयात हतोत्साहित हो और सीपीओ को मंगाकर यहां प्रसंस्करण कर पामोलीन बनाने से देशी तेल उद्योग का परिचालन हो सके।
उन्होंने कहा कि इस मांग की रोशनी में सरकार की ओर से सीपीओ पर आयात शुल्क को घटाकर 16.5 प्रतिशत तथा पामोलीन पर आयात शुल्क को बढ़ाकर लगभग 36 प्रतिशत कर दिया गया। इसका मकसद पामोलीन के आयात को हतोत्साहित करना और सीपीओ के आयात को प्रोत्साहित करना था। विदेशों में सीपीओ का आज का भाव 1,160 डॉलर प्रति टन पामोलीन का 1,110 डॉलर प्रति टन है।
सूत्रों ने कहा कि आयात शुल्क के बाद अब सीपीओ के आयात का भाव 126 रुपये किलो (बगैर मुनाफे के) बैठता है और देश में इसका प्रसंस्करण करने के बाद इस पामोलीन तेल को चार प्रतिशत नीचे दाम यानी 121 रुपये किलो के भाव बेचा जा रहा है। इससे देश की प्रसंस्करण मिलों को तो घाटा ही हो रहा है लेकिन इस बारे में अब कोई चिंता नहीं की जा रही है। इसके मुकाबले तो पामोलीन का आयात ही सस्ता बैठता था और इसकी वजह से विदेशीमुद्रा की भी बचत होती थी। तेल संगठनों या शुल्क अंतर बढ़ाने का समर्थन करने वालों को इस पर विचार करने की जरुरत है।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 7,050-7,100 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 5,600-5,975 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 13,350 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,180-2,480 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 15,100 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,540-2,640 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,540-2,675 रुपये प्रति टिन।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,725 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 11,600 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,750 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,100 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 12,100 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 4,625-4,675 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,325-4,425 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश रमण
रमण
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.