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Wednesday, 1 April, 2026
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अप्रैल-सितंबर में आसियान देशों से कागज और पेपरबोर्ड का आयात 14 प्रतिशत बढ़ा: आईपीएमए

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नयी दिल्ली, 24 नवंबर (भाषा) उद्योग निकाय आईपीएमए ने सोमवार को कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में आसियान देशों से कागज और पेपरबोर्ड का आयात 14 प्रतिशत बढ़ गया, जो एक खतरनाक प्रवृति जारी रहने का सूचक है। पिछले चार साल में आसियान देशों से आयात मात्रा 30 प्रतिशत से ज़्यादा संचयी वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ी है।

कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टैटिस्टिक्स के महानिदेशालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए, इंडियन पेपर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईपीएमए) ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में आसियान देशों से आयात 2.07 लाख टन तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 1.82 लाख टन था।

आईपीएमए ने कहा कि अब भारत के कुल पेपर और पेपरबोर्ड आयात में आसियान देशों का हिस्सा 20 प्रतिशत से ज़्यादा है, जो पिछले वित्त में 20 लाख टन से ज़्यादा था।

आईपीएमए के अध्यक्ष, पवन अग्रवाल ने कहा, ‘‘भारतीय कागज उद्योग ने हाल के वर्षों में अपनी क्षमता को आधुनिक बनाने, स्वच्छ एवं हरित प्रौद्योगिकी को अपनाने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और कृषि-वानिकी को बढ़ावा देने के लिए 30,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ये निवेश, और घरेलू उद्योग का भविष्य, भारत में डंप किए जा रहे खासकर इंडोनेशिया और चीन जैसे देशों से होने वाले घातक आयात की वजह से गंभीर रूप से खतरे में पड़ रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि यह चुनौती उन व्यापार समझौतों से और बढ़ जाती है जो भारी शुल्क रियायत देते हैं।

जहां आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (एआईटीआईजीए) के तहत आयात पर शून्य आयात शुल्क लगता है, वहीं चीन से कागज आयात पर एशिया प्रशांत व्यापार समझौता (एपीटीए) के तहत 30 प्रतिशत शुल्क रियायत मिलता है।

आईपीएमए ने कहा कि इंडोनेशिया और चीन जैसी निर्यातोन्मुख अर्थव्यवस्था अपने अधिशेष कागज और पेपरबोर्ड के लिए भारत को डंपिंग ग्राउंड के तौर पर तेज़ी से इस्तेमाल कर रही है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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