नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में कहा कि बेहतर और कुशल सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच होने से परिवारों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम होती है और उनकी मासिक परिवहन लागत में भी कमी आती है।
‘भारत में ढांचागत विकास का स्वर्णिम दशक, मेट्रो रेल नेटवर्क के विशेष संदर्भ में’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि परिवहन खर्च में कमी आने से परिवारों पर मासिक किस्तों (ईएमआई) का बोझ भी कम होता है, जो कि शहरी परिवारों की सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय प्रतिबद्धताओं में से एक है।
यह अध्ययन रिपोर्ट हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली के उदाहरणों का हवाला देते हुए कहती है कि मेट्रो सुविधा वाले इलाकों में रहने वाले परिवारों के वित्तीय अनुशासन में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हैदराबाद में मेट्रो-सेवा वाले क्षेत्रों के परिवारों में कर्ज का समय पर भुगतान न करने की दर 1.7 प्रतिशत घट गई जबकि पूर्व-भुगतान 1.8 प्रतिशत बढ़ गया।
वहीं बेंगलुरु में किस्त का समय पर भुगतान न करने की दर में 2.4 प्रतिशत की कमी आई और पूर्व-भुगतान 3.5 प्रतिशत बढ़ा। दिल्ली के मामले में किस्त चुकाने में चूक 4.42 प्रतिशत कम हुई और पूर्व-भुगतान 1.38 प्रतिशत बढ़ा।
रिपोर्ट कहती है कि इन इलाकों में वाहनों के पंजीकरण आंकड़े भी इन निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं।
पिछले दशक में शहरी परिवहन और मेट्रो रेल नेटवर्क में निवेश ने परिवारों की नकदी प्रबंधन क्षमता मजबूत की और कर्ज प्रबंधन में भी अनुशासन स्थापित किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन व्यवहारगत सुधारों से परिवारों की वित्तीय मजबूती बढ़ी है और व्यापक वित्तीय स्थिरता में योगदान मिला है।
इसके साथ ही भारत में पिछले दशक में राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे में तेजी से प्रगति हुई है। अक्टूबर, 2021 में शुरू हुई प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर योजना इस बदलाव की आधारशिला रही है। यह योजना बुनियादी ढांचे की एकीकृत और बहु-आयामी योजना अपनाकर आर्थिक वृद्धि को मजबूती देने में मदद करती है।
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