नयी दिल्ली, 24 नवंबर (भाषा) कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने सोमवार को होटल और रेस्तरां से किसानों की उपज सीधे किसान-उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से खरीदने का आग्रह किया ताकि आपूर्ति श्रृंखला से बिचौलियों को हटाकर उत्पादकों के लिए बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सके।
सचिव ने होटल उद्योग से पर्यटकों और लोगों के भोजन के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए भौगोलिक संकेत (जीआई) वाले खाद्य उत्पादों को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया।
चतुर्वेदी ने फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) के एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘देशभर में बड़ी संख्या में होटल और रेस्तरां हैं। अगर आप स्थानीय कृषक समुदाय के साथ साझेदारी करके प्रामाणिक भोजन, सब्जियां, मसाले और अन्य चीजें खरीदते हैं, तो यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगा।’’
उन्होंने कृषि मंत्रालय और होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ नार्दर्न इंडिया (एचआरएएनआई) के सहयोग से ‘एफपीओ-हॉस्पिटैलिटी एंड फार्मर्स बेनिफिट’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में कहा कि देशभर में लगभग 35,000 एफपीओ हैं, जिनमें से 10,000 सरकारी योजनाओं के तहत स्थापित हैं।
मंत्रालय एक वेब-आधारित मंच शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके तहत एफपीओ अपनी अतिरिक्त उपज को व्यवसायों, होटलों और रेस्टरां द्वारा सीधी खरीद के लिए पंजीकृत कर सकते हैं।
चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘वे (होटल और रेस्टरां श्रृंखला) वैसे भी स्थानीय मंडियों से फल, सब्जियां, मसाले और अनाज खरीद रहे हैं। हम उनसे अनुरोध कर रहे हैं कि वे सीधे संबंधित किसानों से जुड़े एफपीओ से खरीद शुरू करें।’’
उन्होंने कहा कि कृषि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 18 प्रतिशत का योगदान देती है और 46 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देती है। यह कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों के बीच आय असमानता को उजागर करता है।
सचिव ने कहा कि कृषि क्षेत्र दो प्रमुख चुनौतियों का सामना कर रहा है। पहली चुनौती जोत का छोटा आकार है जो बड़े पैमाने पर उत्पादन और मोल-जोल की शक्ति को सीमित करती है। दूसरी चुनौती, किसानों की उगाई फसलों के भाव और उसकी खुदरा कीमतों के बीच एक बड़ा अंतर का होना है।
उन्होंने कहा कि कृषक समुदायों के साथ सीधी साझेदारी मूल्य में इस अंतर को पाटने में मदद कर सकती है।
चतुर्वेदी ने कहा कि कीटनाशक-मुक्त और जैविक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ रही है। जैविक या प्राकृतिक उत्पाद उत्पादित करने वाले किसान समूह प्रमाणित जैविक खरीद के लिए होटल और रेस्तरां के साथ गठजोड़ कर सकते हैं।
उन्होंने भौगोलिक संकेत वाले उत्पादों के बारे में कहा कि भारत में बासमती चावल के अलावा कई पंजीकृत खाद्य उत्पाद हैं, जिनमें खाद्यान्न, सब्जियां, फल और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
सचिव ने कहा, ‘‘मैं यह भी अनुरोध करूंगा कि आप देश भर में अपने व्यंजनों में उन जीआई उत्पादों को बढ़ावा दें। इससे मुझे यकीन है कि कई पर्यटक यह जानकर प्रसन्न होंगे… और इससे सभी को फायदा होगा।’’
कार्यक्रम में पर्यटन मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव सुमन बिल्ला ने कहा कि प्रत्यक्ष खरीद से दोनों क्षेत्रों को लाभ होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘जब एक पर्यटक यात्रा करता है, तो वह किस चीज को सबसे ज्यादा संजोता है? वह एक प्रामाणिक अनुभव को संजोता है…। पाक-कला उस अनुभव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके लिए ताजी सामग्री की आवश्यकता होती है।’’
एफएचआरएआई के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार जायसवाल ने कहा कि होटल एवं रेस्तरां सीधे एफपीओ से खरीदारी के लिए उत्सुक हैं लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आपूर्ति निरंतर और गुणवत्ता-सुनिश्चित हो।
एचएआई के महासचिव एम. पी. बेजबरुआ ने व्यापक विकास के अवसरों को खोलने के लिए होटल को बुनियादी ढांचे का दर्जा देने की लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराया।
सम्मेलन के दौरान रहूल मैकारियस (विंडहैम होटल्स एंड रिजॉर्ट्स), विश्वप्रीत सिंह चीमा (लेमन ट्री होटल्स) और अंकिता जायसवाल (एचआरएएनआई और यूपीएचआरए) ने भी अपने विचार रखे।
भाषा रमण प्रेम
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