नयी दिल्ली, आठ नवंबर (भाषा) सरकार ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में 15 न्यायिक और तकनीकी सदस्यों को नियुक्त किया है। न्यायाधिकरण इस समय न्यायाधीशों की कमी से जूझ रहा है।
एनसीएलटी दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता और कंपनी कानून से जुड़े मामलों को देखता है।
आधिकारिक आदेश के अनुसार, एनसीएलटी में नौ न्यायिक और छह तकनीकी सदस्य नियुक्त किये गये हैं।
इन सदस्यों को पदभार ग्रहण करने की तारीख से पांच साल या 65 साल की आयु पूरा होने तक, जो भी पहले हो, के लिये नियुक्त किया गया है।
पांच नवंबर के आदेश के अनुसार, मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) टी कृष्णा वल्ली, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) विकास कुंवर श्रीवास्तव, कानूनी मामलों के विभाग में वरिष्ठ सरकारी वकील महेंद्र खंडेलवाल, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) में न्यायिक सदस्य बिदिशा बनर्जी, अधिवक्ता प्रवीण गुप्ता और अशोक कुमार भारद्वाज न्यायिक सदस्यों में शामिल हैं।
अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (पंजाब) कुलदीप कुमार करीर, सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश ( गौतमबुद्ध नगर) विशेष शर्मा और वाणिज्यिक अदालत में जिला अदालत न्यायाधीश (दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा) संजीव जैन शामिल हैं।
तकनीकी सदस्यों में चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रभात कुमार, यूको बैंक के पूर्व कार्यकारी निदेशक चरण सिंह, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की पूर्व सदस्य अनु जगमोहन सिंह, सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त आशीष वर्मा, सिटी बैंक इंडिया में पूर्व निदेशक मधु सिन्हा और पशुपालन और डेयरी विभाग में पूर्व सचिव अतुल चतुर्वेदी शामिल हैं।
एनसीएलटी की कुल 28 शाखाएं हैं और मंजूर सदस्यों की संख्या 63 है। इसमें 31 सदस्य न्यायायिक और 31 सदस्य प्रशासनिक श्रेणी से आते हैं। अध्यक्ष नयी दिल्ली में प्रधान पीठ की अध्यक्षता करते हैं।
भाषा
रमण अजय
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