(लक्ष्मी देवी ऐरे)
नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं सुधार केंद्र (सीआईएमएमवाईटी) के लिए अमेरिकी सरकार का वित्त पोषण कम होने पर इस वैश्विक अनुसंधान संस्था ने भारत और मेक्सिको जैसे देशों से वित्त पोषण बढ़ाने का आग्रह किया है।
मेक्सिको स्थित सीआईएमएमवाईटी ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए नया वित्तपोषण मॉडल बनाने की बात भी कही है।
संस्था के महानिदेशक ब्रैम गोवार्ट्स ने पीटीआई-भाषा को दिए एक विशेष साक्षात्कार में भारत की हरित क्रांति में संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के कारण बाढ़ और सूखे की समस्या बढ़ रही है और खाद्य सुरक्षा पर दबाव बन रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि निवेश में वृद्धि के बिना फसल रोगों के लिए महत्वपूर्ण निगरानी प्रणालियां साल के अंत तक ध्वस्त हो सकती हैं।
गोवार्ट्स ने अपनी हालिया भारत यात्रा के दौरान कहा, ”हम (धन जुटाने में) कुछ हद तक सफल रहे हैं, लेकिन हमें अभी भी न केवल सीआईएमएमवाईटी के लिए, बल्कि आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) जैसे साझेदारों के लिए भी तत्काल अधिक धन की आवश्यकता है।”
उन्होंने 1999 में यूजी99 गेहूं रतुआ रोग का उल्लेख किया, जब सीआईएमएमवाईटी के जीन बैंक ने तेजी से प्रतिरोधी किस्में दीं, जिससे भारत में संकट टल गया।
भाषा पाण्डेय
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