नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) भारत ने विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के तहत दो ऐसे विश्व-स्तरीय बैंकों की स्थापना का लक्ष्य रखा है जिनकी परिसंपत्तियां उन्हें विश्व के शीर्ष 20 बैंकों की सूची में शामिल करें। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा कि वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस) की तरफ से यहां आयोजित परिचर्चा ‘पीएसबी मंथन 2025’ के पहले दिन वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंकों के गठन पर चर्चा हुई।
फिलहाल देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) वैश्विक स्तर पर परिसंपत्तियों के आधार पर 43वें स्थान पर है जबकि निजी क्षेत्र का एचडीएफसी बैंक 73वें स्थान पर है।
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस विचार-विमर्श का मुख्य मुद्दा यही था कि कम-से-कम दो भारतीय बैंक स्वाभाविक ढंग से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनें और शीर्ष 20 बैंकों में शामिल हों।
जब उनसे पूछा गया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए क्या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण को लेकर कोई चर्चा हुई तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया।
डीएफएस सचिव एम नागराजू की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एसबीआई चेयरमैन सी एस शेट्टी और पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अशोक चंद्रा सहित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शीर्ष प्रबंधन ने हिस्सा लिया।
इस बैठक को मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन, रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे, पूर्व डीएफएस सचिव एवं इरडा के पूर्व प्रमुख देबाशीष पांडा ने भी संबोधित किया।
बैठक में बैंकों की स्वायत्तता बढ़ाने, निदेशक मंडल की भूमिका मजबूत करने, एनपीए अनुपात कम रखने, प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने तथा ग्राहक सेवा और शिकायत निवारण को बेहतर बनाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
अधिकारियों ने कहा कि वैश्विक प्रासंगिकता हासिल करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विविध परिचालनों में विशेषज्ञता बढ़ानी होगी।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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