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Sunday, 15 March, 2026
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आरबीआई की नियामकीय व्यवस्था में आठ इकाइयां वित्तीय उत्पादों का करेंगी परीक्षण

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मुंबई, छह जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नियामकीय ‘सैंडबॉक्स’ योजना के तहत भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) समेत आठ इकाइयों को एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) कर्ज के लिये वित्तीय उत्पादों के परीक्षण की अनुमति मिली है।

नियामकीय ‘सैंडबॉक्स’ के तहत इकाइयों को नये उत्पादों या सेवाओं के नियंत्रित दायरे में परीक्षण की अनुमति दी जाती है। इसके तहत संबंधित इकाइयां इसका उपयोग ग्राहकों के साथ कर सकती हैं। इसमें नियामक नियमन के स्तर पर कुछ छूट की अनुमति देता है।

रिजर्व बैंक ने एमएसएमई कर्ज के लिये सितंबर, 2021 में नियामक ‘सैंडबॉक्स’ के तहत कंपनियों का तीसरा समूह शुरू किये जाने की घोषणा की थी।

आरबीआई ने कहा कि उसे तीसरे समूह के अंतर्गत 22 आवेदन मिले। इनमें से परीक्षण चरण के लिये आठ इकाइयों का चयन किया गया।

ये इकाइयां हैं… फिनएजीजी टेक्नोलॉजीज, मोशपिट टेक्नोलॉजीज, माइंड सॉल्यूशंस, न्यू स्ट्रीट टेक्नोलॉजीज; रुपिफी टेक्नोलॉजीज सॉल्यूशंस, सिडबी, सिस आर्क इन्फोमैटिक्स और जिकजुक टेक्नोलॉजीज।

ये इकाइयां इस महीने अपने उत्पादों का परीक्षण शुरू कर देंगी।

एक अन्य बयान में आरबीआई ने नियामकीय ‘सैंडबॉक्स’ के तहत चौथे समूह की शुरुआत की घोषणा की। इस चौथे समूह के परीक्षण का विषय ‘वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम और उस पर अंकुश लगाना’ है।

नियामकीय ‘सैंडबॉक्स’ व्यवस्था में नवप्रवर्तनकर्ताओं, वित्तीय सेवा प्रदाताओं और ग्राहकों को नये वित्तीय उत्पादों के लाभ तथा जोखिम पर साक्ष्य एकत्र करने के लिये कामकाज में परीक्षण की अनुमति दी जाती है।

नियामकीय ‘सैंडबॉक्स’ का उद्देश्य वित्तीय सेवाओं में जिम्मेदार नवोन्मेष को बढ़ावा देना, दक्षता में सुधार लाना और उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाना है।

भाषा

रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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