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Thursday, 12 March, 2026
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ई-20 पर अभियान पैसा देकर चलाया गया, इसका मकसद मुझे राजनीतिक रूप से निशाना बनाना: गडकरी

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नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण वाले पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर पैसा देकर अभियान चला गया था, जिसका मकसद उन्हें राजनीतिक रूप से निशाने पर लेना था।

गडकरी ने वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम की वार्षिक बैठक में यह दावा किया।

उन्होंने कहा, “ई-20 को लेकर सोशल मीडिया पर अभियान पैसे देकर चलाया गया था। यह अभियान एथनॉल के खिलाफ था और मुझे राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए चलाया गया था।”

पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल (ई-20) के मिश्रण वाले ईंधन से वाहनों के प्रदर्शन में गिरावट आने और कलपुर्जों के जल्द खराब होने की चर्चाएं सोशल मीडिया पर काफी तेज रहीं। इस दौरान ई-20 पेट्रोल से वाहनों के माइलेज में गिरावट और इंजन पर असर पड़ने की आशंका जताई गई।

गडकरी ने पेट्रोल में ई-20 की मिलावट करने से जुड़ी चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘सभी पक्षों ने इस बारे में अपना-अपना पक्ष रखा है। इनमें भारतीय वाहन अनुसंधान संघ (एआरएआई) और सियाम भी शामिल हैं।’

उन्होंने कहा कि इस बारे में आया उच्चतम न्यायालय का फैसला भी पूरी तरह साफ है। उन्होंने कहा, ‘मैं बस यही कहूंगा कि जो भी था, उसमें कोई सच्चाई नहीं थी। सब कुछ स्पष्ट किया जा चुका है।’

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने हाल ही में गडकरी पर हितों के टकराव का आरोप लगाया था। उसका कहना था कि परिवहन मंत्री एथनॉल उत्पादन के पक्ष में बोलते रहे हैं जबकि उनके दो बेटे एथनॉल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों का हिस्सा हैं और उन्हें इस सरकारी नीति से फायदा हुआ है।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस पूरे मामले की लोकपाल के माध्यम से जांच कराने की चुनौती भी दी थी।

गडकरी ने कहा कि देश के करीब 22 लाख करोड़ रुपये के ईंधन आयात बिल को देखते हुए ई-20 एक किफायती एवं प्रदूषण-मुक्त देसी विकल्प है। उन्होंने कहा कि अगर यह राशि देश की अर्थव्यवस्था में ही जाए तो इसका फायदा किसानों और देश को होगा।

सरकार ने मक्का से एथनॉल बनाने का निर्णय लिया है जिससे किसानों को 45,000 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में इसका रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।

गडकरी ने कहा, “हमारी कृषि वृद्धि दर बहुत कम है, इसलिए ऊर्जा और बिजली क्षेत्र की ओर कृषि का यह विविधीकरण किसानों के लाभ के लिए सही है।”

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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